अकेला जी का भजन

कविता/भजन

आओ नमन करें हम उनको
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आओ नमन करें हम उनको,
रचा जिसने संसार,
पाल रहा वहीं हम सबको,
बाँट रहा जग में प्यार।
आओ नमन करें हम…।

रहने को दी धरती उसने,
जीने को आहार
जीवन में दिया हर रंग उसने,
दिया बुद्धि,विवेक,सद्विचार।
आओ नमन करें हम…।

नहीं किया भेदभाव किसी से,
नहीं किया दुर्व्यवहार,
हम सब हैं उसी की रचना,
हैं उसके परिवार।
आओ नमन करें हम…।

उसके सिवा मेरा कोई नहीं जग में,
नहीं कोई नाते,रिश्तेदार,
वही है अब सबकुछ मेरा,
बाकी सब बेकार।
आओ नमन करें हम…।
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अरविन्द अकेला

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