काश कभी यूँ होता

काश कभी यूँ होता…!!

कुछ ना कहूँ जब जब मैं,
मेरी ख़ामोशी का तुम लब ढूँढ लेना !
कुछ ना लिख पाऊँ जब ,
तुम मेरा मन पढ़ लेना !!

उदासी मेरे चेहरे पे हो जब,
मेरे हिस्से का तुम मुस्कुरा लेना !
ना दिखूँ कभी सामने तो ,
हवाओं से मेरी हाल पूछ लेना !!

बेचैनी हो दिल में कभी,
बिन् फ़रियाद के मुझे याद कर लेना !
बढ़ जाये जो धड़कने कभी,
उनमें मेरी नाम सुन लेना !!

काश कभी ऐसा यूँ होता ,
मैं चुप के से दबी साँस आऊँ,
और तुम मुझे पल भर में महसूस कर लेना…!!
लौटने का जब वक्त नजदीक आए,
बस इतना मुझसे जिद्द कर लेना…
” वक्त को आज जाने दे …
बस तू मेरे पास ठहर जाना….” !!

-RENA

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