कुष्मांडा माता-रमाकांत सोनी

अष्ट भुजाओं वाली आओ, सिंह सवार हो माता।
धनुष बाण कमंडल, शोभित हे कुष्मांडा माता।

नवदुर्गा स्वरूप चतुर्थ, सर्व सुख दायिनी माता।
दिव्य ज्योति आलोक प्रभा, तेज तुम्हीं से आता।

उत्साह उमंग भरने वाली जीवन में आनंद भरो
जग कल्याणी मात भवानी, अंबे जग पीर हरो

आदि शक्ति आदि स्वरूपा, सर्व सिद्धियो वाली।
दसों दिशाएं आलोकित हो, घर घर लगे दिवाली।

सूर्यलोक निवासिनी माता, दिव्य प्रभा कांति देती।
खुशहाली से झोली भरती, संकट सारे हर लेती।

अमृत कलश हाथ में तेरे, सुशोभित जपमाला।
विद्या बुद्धि यशदात्री, सजा है दरबार निराला

मां कुष्मांडा कल्याण करें, वैभव दे भंडार भरे।
ध्यान धरे जो सच्चे मन से, उनका बेड़ा पार करें।

भाग्य के तारे चमकाती, आराधक पूजक सब तेरे।
सबकी झोली भरने वाली, खोलो मार्ग सारे मेरे।

रमाकांत सोनी नवलगढ़
जिला झुंझुनू राजस्थान

रचना स्वरचित व मौलिक है तथा अप्रकाशित है

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