छठी कात्यायनी विख्याता-रेणु अब्बी रेणू

जय अंबे जय कात्यानी ,
जग माता जी की महारानी।

तुम योगेश्वरी महिमा न्यारी,
तुम हम सब की वरदाती।

आज छठा कात्यानी की नवरात्रि।
माता कात्यायनी शेर सवार,
चार भुजा धारी बाई तरफ ,
एक हाथ में श्वेत कमल दूसरे में खड़ग है।
दाएं दोनों हाथ वरद मुद्रा में है।
मुख पर मुस्कान लिए है।
तुम अपने शरणगत की
पीड़ा दूर करने वाली हो।
तुम जगत माता हो,
क्योंकि पृथ्वी लोक में तुम्हारी ही स्थिति है।
तुम्ही जल रूप में स्थित होकर
संपूर्ण जगत को तृप्त करती हो।
कात्यानी माता काया के रक्षक है।
यदि वह प्रसन्न हो जाए तब
हर तरह के संकट को दूर करती है।
पृथ्वी पर मोक्ष की प्राप्ति करती है है।
जगत में जितनी स्त्रियां हैं
वे सब तुम्हारी ही मूर्तियां है।
झूठे मोह को भी छुड़ाती है।
मंत्र-
सर्व मंगल मांगल्ये,
शिवे सर्वार्थ साधिके ।
शरण्ये त्र्यंबके गौरी,
नारायणी नमोस्तुते ।

जय माता दी💐💐🙏🙏

रेणु अब्बी रेणू

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