दिल को आनंद देने वाली सोनी जी की कुछ रचनाये

ऊंची उड़ान
विधा कविता

उच्च विचार अंतर्मन दौड़े, ऊंची उड़ान।
प्रगति पथ पर बढ़ चले, उन्नति के सोपान।

स्वप्न सुनहरे सच हो, चले विकास की लहर।
सुविधाओं से संपन्न हो, हर गांव हर शहर।

शिक्षा का सूरज दमके, निर्माण हो भरपूर।
चहुमुखी विकास करें, हो हर शख्स मशहूर।

निखर निखर प्रतिभाएं, निखारे आवरण सारा।
कला कौशल कुशलता, की बहती विकास धारा।

सद्भाव प्रेम उर भरकर, चले विकास की ओर।
नवसृजन नव संस्कार से, नवजीवन की भोर

मुदित मन हर्षित हृदय, आनंद के पल हो प्यारे।
उन्नति शिखर नभ को छुए, प्रगति पथ उजियारे।

मेरे बचपन आजा

आजा रे, आजा रे मेरे बचपन आजा,
प्यार के गीत सुना जा रे।

मां की गोद भरी दुलारे, मीत मिलते प्यारे प्यारे।
पिता संग इठला इठलाकर, देखें नए नए नजारे।

बचपन की पाठशाला,गिनती पहाड़े सीखें सारे।
आजा रे, आजा रे मेरे बचपन आजा।

दादी नानी लाड प्यार से, वो बुलाती थी दुलार से।
खेल खिलौने थे सुहाने, मस्त रहे थे जीत हार से।

नटखट नखरे बालमन के, किलकारी सुना जा रे।
आजा रे, आजा रे मेरे बचपन आजा।

मंद मंद हंसी लबों की, तूतलाती तूतलाती बोली।
छोटी-छोटी अंगुलियों से, आशाएं हमने भी घोली।

आंखों की अश्रु धारा के,दृश्य मधुर दिखला जा रे।
आजा रे, आजा रे मेरे बचपन आजा।

जिद पे अड़ना वो भोलापन,वो बचपन अब कहां।
मन की मुरादे पूरी होती, एक बार जो हमने कहा।

राज दुलारा फिर से हमको, एक बार बना जा रे।
आजा रे, आजा रे मेरे बचपन आजा।

नसीब

नसीब निखर जाता है, तकदीर भी मुस्काती है।
सारे ग्रह साथ देते, खुशियों की घड़ी आती है।

सेवा स्नेह संस्कार भर, विनय भाव पलता है।
सद्भावो की धारा में, पुष्प भाग्य का खिलता है।

किस्मत के तारे चमकते, सुखों का लगता अंबार।
अनुराग दिलों में पलता, जीवन में बरसता प्यार।

साथ नसीब उनका देता, जो तूफां से भीड़ जाते।
किस्मत के ताले खुल जाए, कर्मवीर भाग्य बनाते।

जीवन की हर डगर पर, हौसलों की होती दरकार।
राह की बाधाएं करती, पथिकों का आदर सत्कार।

दशानन का दंभ हरने, हरि ने लिया राम अवतार।
वन गमन को चले राघव, नियति लीला अपरंपार।

कृष्ण मित्र सुदामा निर्धन, खेल नसीबों का सारा।
एक तरफ द्वारकाधीश, दूजा दीन सुदामा प्यारा।

रमाकांत सोनी नवलगढ़
जिला झुंझुनू राजस्थान

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