दीपमाला साहू-अखंड रहे सुहाग

कुमकुम चूड़ी मेहंदी लगाकर,कर सोलह श्रृंगार।
नई उमंग लेकर आया,करवाचौथ का त्यौहार।।

बना रहे यूँ साथ हमारा,मन मे है विश्वास।
दे दो वरदान प्रभु मुझको,तुमसे है ये आस।।

चन्द्रमा को अर्ध्य देकर,पाएं ये सौगात।
श्रद्धा प्रेम का दीप जलाकर करें प्रेम की बरसात।।

अखंड रहे सुहाग हमारा,करूँ आज श्रृंगार।
दीप रखकर छलनी में, प्रियतम को रही निहार।।

सुख समृद्धि खुशियों के लिए,रहे निर्जला निराहार।
साथ रहे जन्म जन्म का,रहे प्रेम अपार।।

करें नित मंगल कामना,सपने हो साकार।
करें पूजन मां गौरी की,रहे खुशियों की बौछार।।

शिव गौरी सा प्रेम रहे,अखण्ड रहे सुहाग।
मनोकामना पूर्ण हो मेरी,अमर रहे सुहाग।।

दीपमाला साहू

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