देर ना हुई दफनाने में

देर ना हुई दफनाने में
सध गयी जिन्दगी, सपनों को साधने में।
खजाने रहे यहीं ना देर हुई दफनाने में।।

कल तक तो सब साथ खड़े थे मेरे।
वक्त क्या बदला नजरें सभी ने फेरे।।

तलुवे चाटते थे जो करते दुआ सलाम।
आज उन्हीं की नजरों में हुआ नाकाम।।

हैरत होती है जब तब देख इन्सानी रंग।
ठूंठ होती संवेदनाएं और चेहरा बेरंग।।

धुंध ही है ज़िन्दगी, रोशनी की तलाश है।
गिला क्या भाग्य से,चाॅंद आस – पास है।।

सुषमा सिंह
औरंगाबाद
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(सर्वाधिकार सुरक्षित एवं मौलिक)

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