माता रानी के दो गीत-रमाकांत सोनी

*सजा मां दरबार निराला*

सब के दुख हरने वाली, सजा मां दरबार निराला।
रणचंडी खप्पर वाली, दुर्गा महाकाली ज्वाला।

सिंह सवार मात भवानी, तेरी लीला अपरंपार।
तू है सृष्टि नियंता, तू ही मां जग की करतार।

त्रिशूल चक्र कर सोहे, गदा शंख अरू भाला।
भक्तों की मात भवानी, सजा दरबार निराला।

चंड मुंड मार गिराया, रक्तबीज को भस्म किया।
दुष्टदलनी शक्ति स्वरूपा,भक्तों को अभय किया।

ब्रह्मचारिणी शैलपुत्री, महागौरी कुष्मांडा माता।
कालरात्रि कात्यायनी, सिद्धिदात्री स्कंद माता।

चंद्रघंटा मस्तक सोहे, रूप अनूप मन को मोहे।
केहरी वाहन दस भुजधारी, अभय मुद्रा मां सोहे।

आराधक चरणों में तेरे, मधुर कंठ ले मोती माला।
सबकी झोली भरने वाली, सजा दरबार निराला।
———–///———-

अबला नहीं सबला हूं मैं

अबला नहीं सबला हूं रणचंडी दुर्गा हूं मैं
खडग खप्पर धारणी हूं रक्तबीज संचारिणी हूं

शक्ति का ही रूप हूं प्रकृति रूप अनूप हूं मैं
अथाह प्रेम का सागर हूं शक्ति समेटे भारी हूं

करती धूप में मजदूरी मैं भारत की सबला नारी हूं
स्वाभिमान भरा रग में मेहनत कर खाना सीखा

परिवार पोषण हेतु खून पसीना बहाना सीखा
अबला नहीं सबला हूं रचती नित नए कीर्तिमान

अंतरिक्ष छू लहराया परचम नहीं किया अभिमान
सेवा सुरक्षा शिक्षा में सृजन में हाथ रहा मेरा

कमान देश की रखने में पल पल साथ रहा मेरा
सृजनशीलता राष्ट्रधारा में हरदम हाथ रहा मेरा

धीरज धरा की भांति है हर दुख दर्द सह लेती हूं
निवाला औरों को खिलाकर भूखी भी रह लेती हूं

नारी उत्पीड़न की सीमा हद से पार हो जाती है
क्रोधाग्नि ज्वाला नैनों से रण चंडी बन जाती है

लक्ष्मी रूप में जन्म ले गृह लक्ष्मी बन जाती हैं
पूरे परिवार का पोषण कर अन्नपूर्णा कहलाती है

सदा मां का दर्जा मिला वात्सल्य उमड़ता भावों में
संघर्षों में रही सदा रह लेती सदा अभावों में

रमाकांत सोनी नवलगढ़ जिला झुंझुनू राजस्थान 9460064419

Share

Leave a Comment