सोनी की कविताएं

दिल

विधा कविता

दिल के कुछ रिश्ते अक्सर खास होते हैं
दिल के जुड़ते तार गहरे विश्वास होते हैं
टूट ना जाए दिलों का यह एहसास गहरा
रिश्ते निभाए शख्स वो दुनिया में खास होते हैं

दिल के सारे राज दिल में हमेशा दबाकर रखो
खुशियों का पैगाम आएगा सबको बताकर रखो
खोल दो दिल के झरोखे की सारी खिड़कियां
दिल के दरवाजे को यारों थोड़ा सजा कर रखो

दिल है यह कांच का खिलौना तो नहीं
मचलता जरूर है स्वप्न सलोना तो नहीं
विश्वास की कसौटी पर दिल टूटने ना देना
प्यार का सागर है दिल जादू टोना तो नही

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विषय जीवन चरित्र भगवान श्रीरामचन्द्र जी

राम ही गीत राम ही तान
राम है सात सुरों का ज्ञान
राम है एक सुंदर झंकार
राम ही जीवन और संसार
राम है व्यक्तित्व का दर्पण
संपूर्ण साधना प्रभु को अर्पण
राम शब्द है मीठे बोल
राम नाम है अनमोल

राम शक्ति का आधार
राम ही घृणा राम ही प्यार
राम ही मान प्रतिष्ठा जानो
राम नाम शक्ति पहचानो
राम सृष्टि का है मूल
राम नाम को कभी ना भूल
राम नाम ऋषि मुनि जपते
त्याग तपस्या और तप करते
जपते राम नाम की माला
मुश्किलों से पड़े न पाला

राम को सोचो राम को जानो
राम की शक्ति जन पहचानो
राम नाम ईश्वर स्वरूप
राम शक्ति है सूक्ष्म अनूप
राम है अमृत का भंडार
राम सभी सुखों का सार
राम आत्मा का है तार
बिन रामनाम जीवन बेकार

राम आदि है राम है अन्त
राम जनक है राम है कंत
राम उन्नति का आधार
राम सत्य करो स्वीकार
सोनी लेखनी नजर पसार
राम नाम महिमा अपार
भवसागर को कर लो पार
भज लो राम नाम बहु बार
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होना संवाद जरूरी

घटा प्रेम की सबके दिल मे
लबों पर मुस्काने छाई हो
अटूट प्रेम के रिश्तो में
भाव मधुरता आई हो
अपनापन परिवार में
जो राष्ट्र प्रेम की धूरी है
दिल में जगह बनाने को
होना संवाद जरूरी है

जो रूठे हो उन्हें मनाए
भटके को हम राह दिखाएं
मनमुटाव मिटा मन से
नेह भरी गंगा बहाये
वसुधैव कुटुंबकम् हमारा
मिटाना मन की दूरी है
हृदय से मिलना जुलना
होना संवाद जरूरी है

सुरभित पल पल हो जाए
महके मन का कोना कोना
आनंद भरा सबका जीवन हो
ख्वाब हो सुंदर और सलोना
हर्षित हो हृदय लगा लो
आपस में प्रेम जरूरी है
सुख-दुख बांटे परस्पर
होना संवाद जरूरी है

जो भी हो शिकवा शिकायत
समस्याएं रखना पूरी है
मेलजोल के आंगन मे
भाव झड़ी बरसती पूरी है
मन के मिटे विकार सारे
होती दूर मजबूरी है
खुश परिवेश रखने को
होना संवाद जरूरी है

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शीर्षक बुजुर्ग घर का सम्मान

वट वृक्ष की भांति देते,
घर को ठंडी छांव,
बुजुर्गों का आशीष पाओ,
छूकर इनके पांव।

ज्ञान भरा समंदर है,
अनुभवों का खजाना,
राह सही दिखला देते,
किस पथ तुमको जाना।

स्नेह के मोती लुटाते,
सिखलाते संस्कार जो,
घर की अमूल्य धरोहर है,
प्यार भरा संसार वो।

जिस बगीया को प्रेम से सींचा,
वो माली क्यों दूर रहे,
क्यों उपेक्षित कर दिया उनको,
आज क्यों वे मजबूर रहे।

बहाते सदा स्नेह की गंगा,
जगाते हमारा आत्मविश्वास है,
बुजुर्ग परिवार का गौरव है,
हम सबके प्रिय खास है।

बुजुर्ग घर का अभिमान है,
हम सब का स्वाभिमान है,
आदर्शों को मानकर करो,
घर के बुजुर्गों का सम्मान है।
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विषय किसान
विधा कविता

खुशनसीब होते हैं वो, जो खेतों में रहा करते हैं।
भूमिपुत्र किसान, कृषि कार्य किया करते हैं।
अन्नदाता देश का, जिसमे स्वाभिमान भरा।
भेज देता लाल सीमा पर, रक्षा हेतु मातृधरा।

तपती धूप सहता रहता, तूफानों से टकराता है।
बहा पसीना खेतों में, वो ढेरों अन्न उगाता है।
देश प्रेम रग रग में भरा, लाल भेजता सीमा पर।
स्वाभिमानी वीर बने वो, आंच आए गर धरा पर।

कभी ओला कभी कोहरा, अतिवृष्टि हो जाती।
कड़ी मेहनत किसान की, बेकार चली जाती।
दुर्दशा देख किसानों की, कलेजा मुंह को आता।
दिनकर भी ना देता साथ, सिर पर आग बरसाता।

हल्की नोक से लिखता, सदा देश की तकदीर।
गांव में रहकर भी सजग, बदले वतन की तस्वीर।
अन्नदाता देश का वो, धरती का प्यारा लाल।
माटी से जुड़कर भी, दिखाता हुनर का कमाल।

रमाकांत सोनी
नवलगढ़ जिला झुंझुनू राजस्थान

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