हमने कुछ ना कहा -सुषमा सिंह

स्वप्न तिरने लगे, रात जगने लगी।
हमने कुछ ना कहा, बात फैलने लगी।।

आंखों की भाषा, आंखें समझने लगी।
झुकी झुकी वो नजर,लाज से भरने लगी।।

चर्चे होने लगे, उंगलियाॅं उठने लगीं।
हो कर बेपरवाह मैं, बन-ठन रहने लगी।।

ज़िन्दगी में मेरी, हलचल सी मची।
सैकड़ों तोहमतें, मुझपर लगने लगी।।

पहरे बढ़ने लगे, परदे खिंचने लगे।
ना हो दीदार तेरा, कोशिशें होने लगी।।

प्यार मरता नहीं, जानता है जहान।
जिस्म की बात क्या, रुहें मिलने लगीं।।
सुषमा सिंह
औरंगाबाद

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