जीवन का झरना_राजवर्धन

किसी छोटे से शहर में राजवर्धन नाम का एक लड़का रहता था उसके पिताजी को पंछियों से बड़ा लगाव था, वो अपने पिताजी के लिए गौरैया के दो छोटे-छोटे बच्चे लेकर आया। उसके पिताजी ने उन्हें पिंजरे में रख दिए वह नित्य प्रतिदिन उनकी सेवा करता और उन्हें बड़े प्यार से खिलाता और उन्हें देखता। उनकी देखभाल करता ऐसा करते काफी साल बीत गए, उन्हें बड़े प्यार से पालता -पोस्ता और उन्हें निहारता रहता जैसे उनका लगाव सदियों से हो, शहरों में काफी दिनों एक महामारी का कहर छाया था (कोविड-19) जिसमें मनुष्य को घर से निकलना मुश्किल हो गया था। यह महामारी राजवर्धन के शहर तक भी पहुंच गई। उस महामारी ने पूरी दुनिया पर जैसे कब्जा कर रखा हो, इस महामारी मैं बाहर जाना नामुमकिन (मुश्किल) था। वह अब घर रह रहा था। उसे घर मानो तो बहुत ही बुरा लगता हो। वह एक दिन बहुत उदास बैठा था। उसकी नजर पिंजरे पर पड़ी, उसने देखा की मैं तो कुछ दिनों मैं ही इस महामारी के कारण घर बैठे-बैठे थक गया हूं। लेकिन यह पंछी को कैद करके रखना गलत है, उसकी बाहर की आजादी उन पंछी के दुखों से करता है,और वह पिंजरे में कैद पंछियों को आजाद कर देता है। और उनसे कहता है, तुम इस खूबसूरत गगन मैं भ्रमण करने के लिए बने हो, इस पिंजरे के लिए नहीं, राजवर्धन ने उन पंछियों को जैसे नया जीवन दे दिया हो, पिता ने देखा तो , कहा बेटा तुमने बहुत अच्छा किया, जो इन बेचारे बेजुबान पंछी को आजाद कर दिया, देखो वह आसमान में कितनी ऊंचाई पर उड़ रहे हैं, ऐसा कहने पर राजवर्धन अपने पिता के पास गया और कहा की,हम पंछियों से उनकी आजादी छीन रहे है।
हम (कोविड 19) से कुछ समय में ही इतना परेशान हो गए है। एक जगह घर में रहते रहते ।
नारी तुम अबला नहीं
पंछी भी तो सोचते होंगे जब आकाश में और उड़ते परिंदो को देख कर काश हम इस पिंजरे में न होते , इसलिए मैने पंछियों को आजाद कर दिया। पिता ने कहा बेटा तुमने बहुत अच्छा किया। सुंदर गौरेया के बच्चों को आजाद कर दिया। अब राजवर्धन बहुत खुश था ।
पिता का पंछियों बहुत लगाव होने के कारण अपने बेटे से छिपकर बरामदे मैं बैठकर उस पिंजरे को बड़े प्यार से देखता रहता और उनकी सेवा को याद करता रहता। एक दिन बरामदे में बहुत सुबह जाता है वह देखता है कि वह गौरैया के बच्चे वही खेल रहे थे, उन्हें देखकर बहुत खुश हुआ। चिड़िया के बच्चे भी मालिक को देखकर बहुत खुश हुए। वह अपने मालिक के पास आकर चहकने लगे मानो कुछ कह रहे हो, इतने में राजवर्धन वहां आ जाता है, वह बोलता है, ये वो ही गौरैया के बच्चे हैं, पिता जी जो मैंने आपको दिए थे। हां, बेटा यह पंछी वही है।
आज कल मोहब्बत में पहले सी बात कहां
राजवर्धन ने उन पंछियों से बोला अब तुम दोनों रोज पापा से मिलने आया करो। ठीक है और रोज पूरी। दुनिया में घूम आया करो ऐसा बोलने पर चिड़िया के बच्चे राजवर्धन की गोद में बैठकर चहकने लगे। जैसे मानो वह बहुत खुश हो। सुन्दरी अहिरवार
भोपाल मध्यप्रदेश

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