क्या जवाब दूं सवाल बहुत करती दुनिया मुझसे

जज्बातों की अभिव्यक्ति

कुछ कदम संग मेरे चल देते तो अच्छा था
फासले सफर के कम कर देते तो अच्छा था

ना समझना इसमें मेरी ख्वाहिश तुम कभी
दो चार पल जो खुशी के जी लेते तो अच्छा था

क्या जवाब दूं सवाल बहुत करती दुनिया मुझसे
खामोशी में मेरे कुछ दखल देते तो अच्छा था

यह दांवपेच दुनियादारी के समझ नहीं आते
उलझन को मेरी हल कर देते तो अच्छा था

क्या लगती है बीना तो उसकी ऐ तो बता
काश जिंदगी को वो ग़ज़ल कर देते तो अच्छा था

डा बीना “रागी”
छत्तीसगढ़

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