आजादी का अमृत-महोत्सव 2022

आजादी का अमृत-महोत्सव,2022

यह आजादी का अमृत है ।

प्राकृति की छटा निराली है,
यहां हरियाली,खुशहाली है ।
भारत भू पर दिखने वाली,
हर चीज लुभाने वाली है ।।
इस धरा धाम से अंबर तक-
हर जीव सुखी व समरथ है।
यह आजादी का अमृत है ।।

इतिहास दिलाता याद हमें,
भारत मां है मानवता की ।
जब-जब यहां संघर्ष हुआ,
यहां हार हुई दानवता की ।।
यह भू,साधु-सन्यासी की,
हर कोई बनने में समरथ है ।
यह आजादी का अमृत है ।।
हर बच्चा राम-कृष्ण जैसा,
प्रेमी जन ज्ञान में आला है ।
मां-बाप परिजनों की सेवा,
जन सेवा का मतवाला है ।।
तन से,मन से, वाणी से,
सेवक बनने में समरथ है ।
यह आजादी का अमृत है ।।
——
यहां,भेद-भाव तकरार नहीं,
दिखावा वाला ब्यौहार नहीं ।
एकता की डोर से बंधे सभी,
बिखरने को कोई तैयार नहीं ।।
चहुंमुखी विकास करने को,
अब भारतवासी समरथ है ।
यह आजादी का अमृत है ।।
——
तिरंगा की शान दिखाना है,
भारत पहचान दिखाना है ।
भाई-चारा कहते हैं किसे,
सारे जग को सिखलाना है ।।
भारत हर युग में रहा गुरु,
‘स्नेही’ अब भी समरथ है ।
यह आजादी का अमृत है ।।

कविता -आओ बनायें एक ऐसा हिन्दुस्तान
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रचनाकार– लखन कछवाहा’स्नेही’
शिक्षक-आ.ज.जा.क.वि.(मंडला)

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