प्रबोधिनी एकादशी चलभाष-काव्योत्सव

(590)’ प्रबोधिनी एकादशी’ चलभाष-काव्योत्सव
*विचार और भाव का संगम स्थल है-साहित्य*
मां कात्यायनी ग्याराहजारी-राष्ट्रीय-काव्य संस्थान
‘विमल भवन’, विकास नगर, लखनऊ-22
चलभाष : 9454831866/7651996416
संरक्षक:श्रद्धेय श्रीश्री गंगेश बाबा (मुजफ्फरपुर)
संस्थापक/संयोजक/संचालक:
-सम्पत्ति कुमार मिश्र”भ्रमर बैसवारी” (छंदकार)
मीडिया प्रभारी-श्री पीयूष मिश्र ”भइयाजी”
मंगलवार, 16 नवम्बर, 2021
अध्यक्षता- श्री एम.सी.द्विवेदी (पूर्व डीजीपी)
मु.अ.-डा.सुरेशप्रकाश शुक्ल (साहित्य भूषण)
वि.अ.-श्री नरेश दीक्षित(हनुमत कृपा पत्रिका)
आचार्य ओमनीरव (कविता लोक संस्थान)
वाणी वंदना-डा. कैलाश नाथ निगम
श्री पीयूष मिश्र “भइयाजी”
श्री के.एस.वाजपेयी (CMO-Gpo लखनऊ)
श्री गिरीश कुमार अवस्थी (मानवाधिकार)
श्री राम प्रकाश त्रिपाठी “प्रकाश”(वरिष्ठ कवि)
डा. शोभा वाजपेयी (वरिष्ठ कवयित्री)
श्रीमती शोभा-आशुतोष अवस्थी (हरदोई)
डा.अलकामिश्रा (डीएसएनपीजी कालेज,उन्नाव)
श्री राजीवकुमार शुक्ल शिक्षक- कवि(वाराणसी)
प्रो.बी.जी.द्विवेदी-डा.प्रतिभापाण्डेय(कानपुर)
श्रीमती आशा अवस्थी (जबलपुर,म.प्र.)
श्री सच्चिदानन्द तिवारी “शलभ” (गीतकार)
प्रो. एस.पी. दीक्षित(पूर्व पत्रकारिता प्र. लविवि)
श्री प्रदुम्न तिवारी (वरिष्ठ पत्रकार )
श्री अमरेन्द्र तिवारी(दैनिक जागरण,मुजफ्फरपुर)
‘शेर’ मिथिलेशसिंह चौहान(पार्षद-लोहियानगर)
श्री राजेश मोहन मिश्र (साहित्य प्रेमी)
श्री आनन्दमोहन द्विवेदी (राष्ट्रपति से सम्मानित शिक्षक, उन्नाव)-प्रो. वी.जी.गोस्वामी(पूर्व ला)
श्री रामेश्वर पाण्डेय (पूर्व संपादकीय प्र.दै.जा.)
श्री संतोष कुमार त्रिपाठी (साहित्य प्रेमी)
श्री अनुराग मिश्र(संपादक, हनुमत कृपा मीडिया)
इंजी.विवेकानन्द प्रसाद (दै.जागरण, मुज.)
श्री अफजाल अहमद अंसारी (वरिष्ठ पत्रकार)
श्री रमेश चन्द्र मौर्य-श्री त्रिलोकी सिंह(साहित्य)
श्री प्रेमशंकर पाण्डेय “मानु भइया” (प्रयागराज)
श्रीअमित टण्डन”कल्लू भइया”(साहित्य प्रेमी)
श्री शिवकैलाश नारायण तिवारी (साहित्य प्रेमी)
श्री विनोद शुक्ल-श्री मनोजझा (पटना-बिहार)
डा.जानकीशरण शुक्ल (वरिष्ठ साहित्यकार)
डा. संगमलाल त्रिपाठी “भंवर”(प्रतापगढ़)
श्री राजेन्द्र शुक्ल “राज” (शिक्षक कवि)
+सम्पत्ति कुमार मिश्र”भ्रमर बैसवारी”छंदकार-
हनुमान अवतार, हुआ चैत्र पूर्णिमा को,
रहा दिन शनिवार, ग्यारा मुख धारे हैं।
कालकारमुखी दुष्ट,राक्षस था ग्यारामुखी,
मारे मरे न किसी से, देव सभी हारे हैं।।
ऋषि-मुनि यज्ञों को, करे वो राक्षस विध्वंस,
कालकारमुखी को हनुमान- संहारे हैं।
देव नर नाग सभी, गये प्रभु राम पास,
शीश धारे प्रभु संकेत, सीता-दुलारे हैं।।
+डा.सुरेश प्रकाश शुक्ल (साहित्य
भूषण)-
‘संगला शिवाला , प्राचीनतम शिव मंदिर,
बना ये पंजाब का ,लुधियाना नगर है l
पाँच सौ वर्षों पूर्व, पत्थर वाले शिवलिंग,
प्रकटे अचानक ये , भोलेनाथ घर है ll
तब से नगरवासी , मनोकामनाएँ लिए,
जलाभिषेक को आते,शिव जी का दर है l
वीरान जगह पर , मंदिर सुरक्षा हेतु,
संगलों से ये, ‘संगला शिवाला’अमर है ll
————
‘मटर’ होती , दलहनी वाली ‘रवी’ उपज,
दाल से अधिक इसकी सब्जी खाई जाती है l
चाट में भी ‘मटर’ का, प्रयोग बढ़ाए स्वाद,
रोटी और चावल साथ, निमोना सुहाती है ll
बाजारों में माँग है तो,मंहगी भी बिक जाती,
खेती में किसानों की , आमदनी करवाती है l
रक्त विकार व साँस रोग, खांसी, कुष्ठ रोग,
चेचक , भूख कमी , मधुमेह ये ठिकाती है ll
+डॉ सत्यदेव द्विवेदी “पथिक”-जब लाखनके हिय
बान लगा, तब लावन बूटि चले बजरंगी। मग में छल रूपहिं काल मिला, तब काल कपाल चढ़े बजरंगी।। सब मुक्ति सु मारग खोल दिया, जब मुष्टि कराल जड़े बजरंगी । पहचान बिलंब पहाड़ उखाड़, सुप्रातहिं पूर्व खड़े बजरंगी ।।
+कर्नल प्रवीण त्रिपाठी(नोएडा)दर-दर ठोकर खाता बचपन, शर्म न हमको आती। बिना तरस खाये बच्चों से, दुनिया नज़र फिराती। एक तरफ नंगा है बचपन, भीख सड़क पर मांगे, तैमूरों को छींक जो आये, कितने पीटें छाती। कितने छोटू चाय पिलाते, पंचर कहीं लगाते,बर्तन धोते कचरा बिनते, जगह- जगह दिन-राती। ऊपर से हँसते हों फिर भी, टीस छिपाये रहते, कितना जीवट भरा हुआ है, बिना कहे कह जाती।
+श्री मयंक किशोर शुक्ल “मयंक”-तोप तलवार छोड़ो,कलम ले चलो। हिंसा दीवार तोड़ो, कलम ले चलो। आज अमृत पिलाकर, मिलो प्यार से,अक्षर अक्षर को जोड़ो ,कलम ले चलो।।
+श्री नन्दलालमणि त्रिपाठी (गोरखपुर)-बढ़ती सर्दी बदलता मौसम प्रकृति का नव यौवन।सिकुड़ता मानव तन दिवस छोटा होती लंबी रात।।फ़टी जुट बोरियां सर्दी कवच गांव गरीबी गली मोहल्ले नगर फुटफाथ।। सूनी आंखे सुखी आंत सर्द से किटकिटाते दांत ‘भ्रमर’ बयां सर्दी का हाल।। विद्वत साहित्य मनीषि की लेखनी बोलती सर्दी में मजबूर मानव संसार।।
+सुकाव्य-सर्वश्री-गोबर गणेश, मनमोहन वाराकोटी, नीतू मिश्रा, शीला वर्मा “मीरा”..
+संयोजक सम्पत्ति कुमार मिश्र “भ्रमर बैसवारी” ने सभी मनीषियों को धन्यवाद ज्ञापित किया।
काव्यपाठ-आमंत्रण(9454831866 /7651996416) संपर्क कर कृतार्थ करेंगे।

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