नबा साल-कवि अम्बरीश शर्मा “अम्बर”

बघेली कविता – नबा साल (नववर्ष)

दुइ दिन चलेन अढ़ाई कोस ।
न तोहरइ दोस न हमरइ दोस ।

गलती भइ जाने अनजाने म ।
का मिलत हइ नागा माने म ।
छमा करा हमरे गलती का ।
सुइकार करा यें बिनती का ।
बिसराबा अब त सगला रोस ।
न तोहरइ दोस न हमरइ दोस ।।

केहू से न एकउ झूठ कहब ।
चाहे हम निकबर ठूठ रहब ।
करेजा म हिन्दुस्तान रहइ ।
हिंद म अरपित जिउजान रहइ ।
बात कहब इया ठोसम ठोस ।
न तोहरइ दोस न हमरइ दोस ।।

साल बीत पुरान बिसराबा ।
चला त सबका गरे लगाबा ।
भले आइ इ अँगरेजी साल ।
सुआगत केर करा खयाल ।
विस्व बन्धुत्व के हइ त होस ।
न तोहरइ दोस न हमरइ दोस ।।

कवि अम्बरीश शर्मा “अम्बर”

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