नया वर्ष-अरुण कुमार शुक्ल

नयावर्ष
मंजरियों से लदी आम की डाली,
महुये ने भी अब श्रृंगार करा ली।
दिग् दिगन्त में छाया है बस खुशी का ही उजियारा,
आया है आज प्यारा ये नयावर्ष हमारा॥…….

मन में मीठी रस घोल रही ,
शाखाओं पे कोयल बोल रही।
हरश्रृंगार ने की श्रृंगार चंपा ने लाके दिये हार,
मलयागिरि की प्यारी चंदन गंगाजल अर्पित बार-बार।
नीम ने मंजन करवायी कस्तूरी ने इत्र लगायी,
दी कपास ने प्रेम भाव से वस्त्र उसे इक प्यारा॥ आया है आज……

आया ये अतिथि है तो फिर उत्सव प्यारे होंगे,
कहीं तिलक यज्ञोपवीत औ कहीं विवाह ठनेंगे।
लगा के हल्दी वर वधुओं को कन्या खूब हंसेगी,
औ विवाह में युगलगीत की महफिल खूब जमेगी।
यहां -वहां रसोंईघर में पूड़ी खूब छनेगी,
अच्छे व्यंजन बनेंगे औ पकवान बहुत ही सारा॥ आया है आज प्यारा…….

बन्दनवार तो टंगे हुये हैं,
गृह-गृह कलश भी सजे हुये हैं।
इच्छा भक्तों की पूर्ण करने को,
सबके मन की दुख हरने को।
एक और मेहमान हैं आयी,
जगदंबा काली जगमायी।
आओ भक्तों करें साथ में माता की जयकारा॥
आया है आज प्यारा ये नया वर्ष हमारा…….

लेखक-अरुण कुमार शुक्ल(सिद्धार्थनगर यू पी)

Share

Leave a Comment