आओ फिर नव वर्ष मनाएं-अशोक शर्मा

*आओ फिर नव वर्ष मनाएं*

छट गयी है दुःख की बदली,
अब घटा सुख की अपनाएं।
शीत ऋतु का स्वागत करके,
चलो नव वर्ष में मन हर्षायें।
आओ फिर नव वर्ष मनाएं।

जो हैं अडिग सही राहों पर,
उनको अपना आदर्श बनाएं।
भटक गए हैं जो इस जग में,
उनको सतपथ राह दिखाएं।
आओ फिर नव वर्ष मनाएं।

छोटा ही सही जुगनू बनकर,
अंधियारा कोना दूर भगाये।
बचपन के सूखे अधरों पर,
किलकारी की कली खिलाएं।
आओ फिर नव वर्ष मनाएं।

राम रहीम के आदर्शों का,
घर घर में प्रकाश जलायें।
सर्व धर्म की मंत्र नमाजे,
मिलाके मानव मन्त्र बनाएं।
आओ फिर नव वर्ष मनाएं।

एक दृष्टि उन सूखे पत्तों पर,
जो हैं अनाथालय अपनाए।
मौन दुवाएँ बन कर माँ की,
उन पर कुछ बून्दें बरसाएं।
आओ फिर नव वर्ष मनाएं।

वृद्धाश्रम अब ना हो कोई,
श्रवण बन चारों धाम कराएं।
बंजर तपती उष्ण धरा पर,
भगीरथ बन वह गंगा लाएं।
आओ फिर नव वर्ष मनाएं।

चल सप्तरंग ला इंद्रधनुषी,
होली गमगीनों संग मनाएं।
आस देखते उजड़े बागन में,
बन बाती एक दीप जलायें।
आओ फिर नव वर्ष मनाएं।

स्वार्थपरक न अगुवा हो कोई,
इक खद्दर कुर्ता नया सिलाएं।
देशहित में पड़ी हैं खण्डहर,
राजेन्द्र जी का घर बन जाएं।
आओ फिर नव वर्ष मनाएं।

काबा काशी माना पवित्र है,
उच्च कर्मों से मोक्ष को पाएं।
देवालय जस मात पितु के ,
चरण द्वार पर शीश झुकाएँ।
आओ फिर नव वर्ष मनाएं।

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अशोक शर्मा,कुशीनगर,उ.प्र.
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