बन सकारात्मक-प्रा मनीषा नाडगौडा

“बन सकारात्मक रह खुशनुमा”

नववर्ष की बेला अनुपम अनूठी
बीतते है साल एक के बाद एक
देकर खट्टा मीठा अनोखा उपहार
ख़ुशी और गम का मेल जाता देकर

आते जाते साल का बेहिसाब हिसाब
लगाता है मानव मन हर बार बार बार
जाते साल की बुराइयों पर रहता है डटा
नही सोचता अच्छा क्या दिया सालने

मंगल बेला का इंतजार अब है
बीत गए गत साल करोना के भयावह मंजर में
नाही मिले अपनोसे ना मिलपाए दोस्त यार से
ना मौज मस्ती का सुहानी वो डगर

जीवन सुहाना सफर सप्तरंग से भरा हुवा
इन्द्रधनु के रंगो में डूबकर उभरना है फिरसे
आँसुओंकी बरसात कभी हँसी का ठहाका
ऋतूंओंके संग बढ़ना लेकर संग प्रकृति का

साल तो आते जाते रहेंगे उम्र भी बढ़ेगी
चिंता में मत बरबाद कर साल पे साल
चल आगे बढ़ आत्मनिर्भर बन कुछ कर दिखा
आगे बढ़ राह अपने आप मिलेगी हे मनुज ,हे मनुज

प्रा मनीषा नाडगौडा
बेलगाम कर्नाटक

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