world of writers बसंत पंचमी का महत्व

बसंत पंचमी विद्यार्थियों का त्यौहार :श्रीराम राय

हिन्दू पञ्चाङ्ग के अनुसार प्रत्येक वर्ष माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को माँ सरस्वती की पूजा अर्चना धूमधाम से की जाती है।वसंत ऋतु को ऋतुओं का राजा कहा जाता है। इस वसंत ऋतु का वर्णन जितना भी किया जाय कम है। पेड़ पौधों पर नए कोमल पत्ते आने लगते हैं। फलों का राजा आम भी मंजरों से लदने लगता है। कोयल की कुक से सम्पूर्ण माहौल संगीतमय हो उठता है। सरसों के खेत पीले फूलों से सज जाते हैं।

प्रकृति का यह अनुपम श्रृंगार देखते ही बनता है। इस ऋतु में हवा की चाल भी ऐसी रहती है कि चारों ओर मस्ती और हर्ष का माहौल छा जाता है। लोग आनंदायक पुरवइया हवा में रंग-गुलाल उड़ाने को मजबूर हो जाते हैं। माँ सरस्वती को अबीर अर्पण के साथ ही रंगों का त्यौहार होली थिरक उठता है।

विद्यार्थियों के लिए बसंत पंचमी का बहुत खास महत्व है। शास्त्रों के अनुसार भगवान विष्णु की इच्छा से ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की। धरती पर जीवन प्रारंभ हुआ लेकिन विद्या और गीत संगीत के अभाव के कारण सम्पूर्ण सृष्टि में उदासी छायी हुई थी। इस उदासी को दूर करने के लिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से अपने द्वारा सृजित सृष्टि पर जल छिड़का। इसी जल से माँ सरस्वती उत्पन्न हुई। माँ सरस्वती वर देने की मुद्रा में चार भुजाओं के साथ थी। उनकी भुजाओं में वीणा, पुस्तक, माला शोभायमान थे।इसी मुद्रा की पूजा भी की जाती है। माँ सरस्वती की वीणा से झंकार उत्पन्न होते ही, सृष्टि झंकृत हो उठी। ज्ञान की गंगा प्रवाहित होने लगी।
जब ज्ञान की गंगा प्रवाहित हुई तब विद्यार्थियों ने धूमधाम से डुबकी लगाना प्रारंभ किया। माँ सरस्वती सबके लिये विद्या की देवी हैं।
घर ही स्वर्ग है अपना
विद्याध्ययन करने वाले तन- मन -धन के साथ वसंत पंचमी का इंतजार करते हैं। इस दिन हंस पर सवार माँ सरस्वती की मूर्ति स्थापित कर विद्यार्थियों के द्वारा पूजन अर्चन किया जाता है। बच्चे माँ सरस्वती की पूजा आरती के पश्चात ही भोजन ग्रहण करते हैं। इस पूजा काल मे बच्चों का उत्साह देखते ही बनता है। नए नए रंग विरंगे परिधानों में छात्र- छात्राओं की बाढ़ आ जाती है। इस अवसर पर किसी प्रकार का भेद -भाव नहीं रहता। सभी जय माँ शारदे का जयकारे लगाते रहते हैं। संध्या बेला में विद्यार्थियों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किये जाते हैं । बच्चे अपनी पुस्तकें माता की चरणों से अगले दिन हवन के साथ विसर्जन होने पर ही उठाते हैं। इस वर्ष पांच फरवरी को वसंत पंचमी है और छः फरवरी रविवार को माँ सरस्वती की प्रतिमा का विसर्जन किया जायेगा।

—-श्रीराम राय, शिक्षक, जयप्रकाश नगर,इटखोरी

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