पांचदिनी दीपोत्सव -भाई दूज-काव्य समारोह

(580)’पांचदिनी दीपोत्सव’ “भाई दूज”-काव्य[ngg src=”galleries” ids=”1″ display=”basic_thumbnail”]
*विचार और भाव का संगम स्थल है-साहित्य*
मां कात्यायनी ग्याराहजारी-राष्ट्रीय-काव्य संस्थान
‘विमल भवन’, विकास नगर, लखनऊ-22
चलभाष : 9454831866/7651996416
संरक्षक:श्रद्धेय श्रीश्री गंगेश बाबा (मुजफ्फरपुर)
संस्थापक/संयोजक/संचालक:
-सम्पत्ति कुमार मिश्र”भ्रमर बैसवारी” (छंदकार)
मीडिया प्रभारी-श्री पीयूष मिश्र ”भइयाजी”
शनिवार, 06 नवम्बर, 2021
अध्यक्षता-डा अलकामिश्रा (डीएसएन,उन्नाव)
मु.अ.-श्रीमती आशा अवस्थी(जबलरपुर)
वि.अ.-श्रीमती गीता पांडेय अपराजिता (रायबरेली)
वाणी वंदना-श्रीमती शीला वर्मा “मीरा”
डा. सुरेश प्रकाश शुक्ल (साहित्य भूषण)
श्री महेन्द्रभीष्म (वरिष्ठ साहित्यकार)
डा. शोभा वाजपेयी (वरिष्ठ कवयित्री)
श्रीमती शोभा-आशुतोष अवस्थी (हरदोई)
डा. राम बहादुर मिसिर(अवधी कवि)
श्री राजीवकुमार शुक्ल शिक्षक- कवि(वाराणसी)
प्रो.बी.जी.द्विवेदी-डा.प्रतिभा पाण्डेय(कानपुर)
श्री सच्चिदानन्द तिवारी “शलभ” (गीतकार)
श्री कैलाश प्रकाश त्रिपाठी “पुंज” (वरिष्ठ कवि)
प्रो.एस.पी.दीक्षित(पूर्व पत्रकारिता प्र. लविवि)
श्री प्रदुम्न तिवारी (वरिष्ठ पत्रकार )
श्री अमरेन्द्र तिवारी(दैनिक जागरण,मुजफ्फरपुर)
‘शेर’ मिथिलेशसिंह चौहान(पार्षद-लोहियानगर)
श्री राजेश मोहन मिश्र (साहित्य प्रेमी)
श्री आनन्दमोहन द्विवेदी (राष्ट्रपति से सम्मानित शिक्षक, उन्नाव)-प्रो.वी.जी.गोस्वामी(पूर्व ला)
श्री रामेश्वर पाण्डेय (पूर्व संपादकीय प्र.दै.जा.)
आचार्य ओम नीरव (कविता लोक,संस्थान)
श्री संतोष कुमार त्रिपाठी (साहित्य प्रेमी)
श्री अनुराग मिश्र(संपादक, हनुमत कृपा मीडिया)
इंजी.विवेकानन्द प्रसाद (दै.जागरण, मुज.)
श्री अफजाल अहमद अंसारी (वरिष्ठ पत्रकार)
श्री रमेश चन्द्र मौर्य-श्री त्रिलोकी सिंह(साहित्य)
डा.अलकामिॆश्रा(डीएसएनपीजी कालेज,उन्नाव)
श्री प्रेमशंकर पाण्डेय “मानु भइया” (प्रयागराज)
श्रीअमित टण्डन”कल्लू भइया”(साहित्य प्रेमी)
श्री शिवकैलाश नारायण तिवारी (साहित्य प्रेमी)
श्री विनोद शुक्ल-श्री मनोजझा (पटना-बिहार)
श्री राजेन्द्र शुक्ल “राज” (वरिष्ठ कवि)
डा.जानकीशरण शुक्ल (वरिष्ठ साहित्यकार)
डा. संगमलाल त्रिपाठी “भंवर”(प्रतापगढ़)
श्रीमती आशा अवस्थी (जबलपुर, म.प्र.)
श्री एम. सी.द्विवेदी (पूर्व डीजीपी, उ.प्र.)
+सम्पत्ति कुमार मिश्र “भ्रमर बैसवारी”छंदकार-
बेटी-बचाअो, बेटी-पढ़ाओ,प्यारी वानी है।
नवदुर्गे की माया की ये, सुखद निशानी है।
–भौजी की है सखी-सहेली,भैया की रोली-राखी;
बाबुलके अंगने की तुलसी,पति अंगनेकी रानी है।
–दादा-दादी की लाठी, चश्मा अौ सिर दर्द दवा;
चाचा की गुडिया प्यारी है, बुआ सयानी है।
—हाथ बटाती है अम्मा का, उसकी धन रक्षक;
पिता की पगडी, मान-प्रतिष्ठा, युगों पुरानी है।
–मामा-मामी से वह झगडे, जेब कराती खाली;
उसके,अपने मन प्राणों में, नाना- नानी है।
–बेटों से कम नहीं है बेटी, शिक्षित उसे बनायें;
संस्कार ‘पीयूष’ घोलने में, सज्ञानी है।
-अपनोंका वो सबकुछ सहती,समझ न पायेकोई;
“भ्रमर”जो अपने-कष्टमें घिरें, बनती कात्यायनी है।
+डा.सुरेश प्रकाश शुक्ल (साहित्य भूषण)-
दीवाली दूसरे दिन , आती भाई दूज l
सलामती को हर बहन , व्रत रहती है पूज ll
कार्तिक शुक्ल द्वितीय को,मृत्यु देव यमराज l
यमुना बहन आग्रह पर,घर पहुंचे महाराज ll
तिलक लगा मीठा किया,मुंह माँगा वरदान l
भाई आएं हर बरस , दे दो जीवन दान ll
आशिषा यमराज ने, किया बहन को याद l
परंपरा तब से यही , निभती है निर्वाध ll
भाई की लम्बी उम्र , हेतु बहन यम दीप l
रखती, कहती दें नहीं, मृत्यु अकाल महीप ll
+डॉ सत्यदेव द्विवेदी “पथिक”-भाव भाषा तुम्ही से मिली मातु है, जीभ पे वास होता जभी आपका।
प्राण होता महाप्राण आशीष से, वर्ण संयुक्त होता कभी आपका।। धान्य समृद्धिसे श्रेष्ठ तो कीर्ति है, त्यागके भावमें हैसभी आपका। ध्यानमें भावधारा
जुड़ी हो जहाँ,प्राप्त आशीष होता तभी आपका।।
+श्री मयंक किशोर शुक्ल “मयंक”-
पूजन की थाली सजा,आसन नेह बिछाय।
फूलों की माला पिन्हा,चंदन माथ लगाय।।
बहिन जिनके है नहीं,सूनी कहे कलाई।
कौन देख हरषे यहाँ, जग विचित्र है भाई।।
भाई बहिन त्योहार की,महिमा रचे स्वदेश।
पांवन भारत भूमि है,मिटा अनीति क्लेष।।
भाई बहिन के प्रेम को तोड़ सके न कोय।
जहाँ चरण दोनों धरें,कण कण कंचन होय।।
+श्रीमती गीता पांडेय “अपराजिता” (रायबरेली)-
सूर्य की लालिमा से व्योम आच्छादित हुआ ।
दिनकर की किरणों से है जग तरंगित हुआ ।
पक्षी भी चहचहाये पाकर ये अहसास,
भाई दूज पर्व पर मन आनंदित हुआ।
+श्री नन्दलाल मणि त्रिपाठी (पीताम्बर,गोरखपुर)-
भाई बहन का रिश्ता प्यार से एक दूजे के लिये भैया दूज संस्कृति
सांस्कार।।
भाई बहन की प्रतिष्ठा परम् प्रतिज्ञा भारत में रिश्तों की ऊंचाई सत्कार।।
बहन चाहती अक्षय अक़्क्षुण भाई ,बहना की सुख शांति सुरक्षा कवच कर्म धर्म महिमा महत्व का रिश्ता प्यार।।
बहना कहती अजर अमर जय जय हो भाई की भाई कहता निर्मल निर्झर अविरल अचल अटल रहे तेरी खुशियाँ एहिवात घर संसार।।
+सुकाव्य-सर्वश्री-गोबर गणेश, मनमोहन वाराकोटी, नीतू मिश्रा, शीला वर्मा “मीरा”..
+संयोजक सम्पत्ति कुमार मिश्र “भ्रमर बैसवारी” ने सभी मनीषियों को धन्यवाद ज्ञापित किया।
काव्यपाठ-आमंत्रण(9454831866 /7651996416) संपर्क कर कृतार्थ करेंगे।

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