बीबी मुझसे नाराज है

बीबी मुझसे नाराज है
कल तक मीठी बानी से,
मन में मिश्री घोलती थी।
मंत्रमुग्ध हो जाता था ,
जब हँसकर मुझसे बोलती थी।
आज कौए जैसी कर्कश
बनी हुई आवाज है।
क्या कहूँ किससे कहूँ
बीबी मुझसे नाराज है।।

मैका से बुलावा आया,
जाना है,मुझसे फरमाया।
सिस्टर की शादी है उसकी
खरीदारी का लिस्ट थमाया।
पैसे के बिन पड़ा अधूरा ,
उसका सारा काज है।
कैसे कहूँ किससे कहूँ,
बीबी मुझसे नाराज है।।

मैने उसको खूब समझाया,
देर अभी है शादी मे।
रखा है क्या इतना पहले से,
पैसे की बर्बादी में।
नागन सी फुंकार मारती,
बोली जरूरत आज है।
कैसे कहूँ किससे कहूँ,
बीबी मुझसे नाराज है।।

सीताराम पवार की सुंदर रचनाएं

बात-बात पर गाल फुलाती,
मैके का वो धौंस दिखाती।
फरमाइशें गर पूरी न हो तो,
घर में वो कोहराम मचाती।
नए-नए नखरे का घर मे,
शुरू हुआ आगाज है।
कैसे कहूँ किससे कहूँ,
बीबी मुझसे नाराज है।।

कवि–प्रेमशंकर प्रेमी (रियासत पवई) औरंगाबाद

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