राम पर कुछ मुक्तक-ब्रजेन्द्र नारायण

राम हमारे स्वांस स्वांस में
बस से हमारे भूख प्यास में
राम अँधेरे में उजास में
राम का नाम बुलाएंगे।
राम से नेह लगाएंगे।।

राम है जीवन ए पल पल में
तप्त अग्नि में शीतल जल में
इतना तो विश्वास है मन को
उनसे जीवन पायेंगे।।
राम से नेह लगाएंगे।।

राम है भीतर राम है बाहर
साथी बन रहते करुणाकर
दुख सुख के आधार वही हैं
त्याग न उनको पाएंगे।।
राम से नेह लगाएंगे।।

राम अजामिल उद्धारे
शबरी गीध व्याध को तारे
पतित उधारन नाम है उनका
बार-बार दोहराएंगे।।
राम से नेह लगाएंगे।।

हनुमत के प्रिय स्वामी हैं वे

नीति नियम अनुगामी हैं वे

कर्मवीर निष्कामी है वे

  • गुण उनके अपनाएंगे।
    राम से नेह लगाएंगे।।

दुश्मन जिनकी करे प्रशंसा
अद्भुत है वह मानस हंसा
उनकी ही शीतल छाया में अपना समय बिताएंगे
राम से नेह लगाएंगे।।

विद्या के आधार राम है जीवन के संस्कार राम हैं उनकी ही पावन चरणों में अपना माथ झुकाएंगे।।
राम से नेह लगाएंगे।।

भ्राता पिता बंधु हे रघुवर सारा जग उन पर है निर्भर
नहीं स्वजन कोई उनके जैसा
दूर किस लिए जाएंगे।
राम से नेह लगाएंगे।।
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डॉ ब्रजेन्द्र नारायण द्विवेद्वी शैलेश वाराणसी

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