राधा कृष्ण -गोपाल मिश्र

चांद चांदनी सूरज और गरमी
नहीं अलग हैं जैसे,
श्याम और श्यामा की जोड़ी
नहीं अलग हैं वैसे।

राधा के विन श्याम नहीं
श्याम बिना नहीं राधा
एक दुसरे के विन हैं वो
दोनों ही आधा आधा।

राधा मिल गई श्याम से
श्याम मिले संघ राधा
एकाकार रुप देखी जिसने
दूर हुई सब उनकी बाधा।

राधा कृष्ण की जोड़ी जग में
है बहुत अनुपम अनमोल,
नहीं बनी है कोई तराजू
जो तौले इनकी मोल।

दीन हीन खड़े चौखट पे
राधे राधे रटे पुकारे
मिल जाएगी कृपा हमेभी
बस इसी उम्मीद के सहारे।

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