महर्षि बाल्मीकि-चंदा देवी स्वर्णकार

कविता

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शत शत नमन वंदन करते हैं
संस्कृत रामायण के रचयिता थे|
प्रचेता पुत्र आदि कवि महर्षि थे|

पुराणों के अनुसार महर्षि का
नागा प्रजाति जन्म हुआ था
एक कुख्यात डाकू थे|
बचपन का नाम रत्नाकर था|

ऋषि मुनियों की संगत पाकर
स्वयं भी ऋषि मुनि कहलाए थे|
बाल्मीकि की त्याग तपस्या से
भगवान ब्रह्मा जी खुश हुए थे|

ब्रह्मा के आदेश से ही
संस्कृत में रामायण महाकाव्य लिखा था
मां सरस्वती की कृपा से
सौभाग्य बाल्मीकि को प्राप्त हुआ था|

महर्षि वाल्मीकि जी ने एक ऐसे
ग्रंथ रामायण की रचना की थी
जिसमें मर्यादा सत्य प्रेम तत्व एवं
सेवक धर्म की भाषा सिखाइए|

पूजनीय पंडित कवियों में थे
ऐसे महान चरित्र महाकवि थे
उनकी याद जयंती मनाते
हम सब नमन वंदन प्रणाम करते|

कुमारी चंदा देवी स्वर्णकार थे
उनकी याद जयंती मनाते
हम सब नमन वंदन प्रणाम करते|

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आखरी मुलाकात -निर्मल जैन ‘नीर’

कुमारी चंदा देवी स्वर्णकार

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