शायरी कुछ मेरी भी

🙂
पास हो हिम्मत दुनिया शीश झुकाती है।
कोशिश करके चींटी पहाड़ चढ़ जाती है।।
😭
बात करना जो छोड़ देते हैं
रिश्ते दुसरो से जोड़ लेते हैं
आहे भरते रहते हैं तब
जब दूसरे भी रिश्ता तोड़ लेतेहैं।।
😎
यहाँ टच कर पढ़ें कविता
टच कर पढ़े ताज़ी रचनाये -आंखों में जादू और घूँघट
😃
उनकी आंखों को जो समुंदर कहते हैं
गल जाती है मांस हड्डियों के सहारे रहते हैं।
😌
बात होगी तब मुलाकात भी होगी
सपनों में खोने को हंसी रात भी होगी।
😃
फूल तोड़ लेंगे हम
पकड़ उसे लेंगे हम
भाग कर जहाँ जाए
ढूंढ उसे लेंगे हम।।
🐷
मन चंचल आईना तोड़ देता है
पहुंच मंझधार में नैया,पतवार छोड़ देता है।।
😎
इसीलिए तो दिल फेंक कहते हैं लोग
दिल लगा कर फरेब ही करते हैं लोग।।
—श्रीराम रॉय

Share

2 thoughts on “शायरी कुछ मेरी भी”

Leave a Comment