नव वर्ष-डॉ ब्रजेन्द्र नारायण द्विवेदी शैलेश वाराणसी

आएगा नूतन साल हमें कुछ करना है।
जिससे हो देश खुशहाल हमें कुछ करना है।।

बीती बातों को विसराओ ,
क्या करना है करलो निश्चय। हारेगी हमसे आधी व्याधि ,
हो कदम बढ़ाओ अब निर्भय।
हों सुखी वृद्ध युव बाल, हमें कुछ करना है।।१
छाये हरीतिमा भूतल पर,
पवन पवन मुस्काएँ सुमन।
हर और प्रगति की बहे हवा,
हर्षित हों गांव नगर जन जन।
आए न अकाल दुकाल, हमें कुछ करना है।।२
नदियों का सहज प्रवाह बने किल्लोल करें नव धाराएं।
तरुण छाया फल दें हमको,
आ मेघ बरस्कर भर जाएँ।
फिर गोंइंड़ वाला ताल, हमें कुछ करना है।।३
मन का मालिन्य निकल जाए,
ममता का आंचल लहराए। जय हो स्वदेश,
जय भारत की ,अधरों से हर कोई गाए।
न उत्तर हो, न सवाल, हमें कुछ करना है।।४
यह देश विश्व गुरु कहलाए,
जगती का मस्तक झुक जाए।
सहयोग प्रीति संतोष धैर्य,
की सुंदर सरिता लहराए।
हो ऐसा दिव्य कमाल, हमें कुछ करना है।।५

-डॉ ब्रजेन्द्र नारायण द्विवेदी शैलेश वाराणसी

Leave a Comment