ठंडा ठंडा है मौसम नए साल में-डॉ. दीप्ति गौड़ “दीप”

“ठंडा ठंडा है मौसम नए साल में”

गर्म कपड़े पहन कर रहा कीजिए,
ठंडा ठंडा है मौसम नए साल में।
नया अफसाना कोई बनाना है तो,
आओ मिल जाएं हम तुम नए साल में।

तुमको देखा नहीं है तो क्या हो गया,
ढूंढ ही लेंगे तुमको बहारों में हम।
फ़लसफ़ा भी बताता है मिल जाएगा,
कोई-न-कोई हमदम नए साल में।

प्यार की खुशबू बनकर चले आइए,
मेरी साँसों में आकर समा जाइए।
मैं नया गीत लिखने को बेताब हूँ,
छेड़ दो कोई सरगम नए साल में ।

ये साल तुमको मुबारक रहे,
फूल ही फूल खिलते रहें राह में ।
रब करे प्यार हो जाए मेरी तरह,
दिल का मिट जाए हर गम नए साल में।

© रचनाकार
डॉ. दीप्ति गौड़ “दीप”
शिक्षाविद् एवम् कवयित्री
ग्वालियर मध्यप्रदेश भारत
(वर्ल्ड रिकॉर्ड पार्टिसिपेंट)

Leave a Comment