नव वर्ष का नया चित्र- डॉ सीमा मोहन

*नव वर्ष का नया चित्र*

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पुराने वर्ष की ठिठुरन को
नववर्ष की किरणों ने मिटाया।
प्रकृति ने रचा नव वर्ष का नया चित्र,
सिंदूरी सुबह लाई नव की लालिमा ।
सर – सर हवाओं में उडते रंगीन पंछी ,
ले आए प्राची से उजियारे दिन।
झरनों ने कल कल से गाया नववर्ष,
सिंदूरी सुबह लाई नव की लालिमा ।
मधु किरणें पूरब से आई छम छम ,
घुल गई रेवा के नीर में सिंदुरी आभा।
सुखद रात लाई नया उजियारा ,
वृक्षों पर फैली चमकीली पातें
स्नेहिल सूरज बॉंट रहा है सौगाते,
अलसाई धूप में खिली नव वर्ष की आभा ।सिंदूरी सुबह लाई नव की लालिमा ।
पुरानी यादों को छोड़कर ,
नए सफर की राह पर।
नए संकल्प नए विश्वास की
अंजलि को लिए ।
सिंदूरी सुबह लाई नव की लालिमा।।
नई धूप छांव के खेल में ,
नई उमंगों की किरण में।
सिंदूरी सुबह की लालिमा में रचा ,
नववर्ष का सुंदर चित्र।
संयम ,एकाग्र का गुण
वाणी की मधुरता का
कर्तव्य का संदेशा देती
सिंदूरी सुबह लाई नव की लालिमा
जिसने रचा नववर्ष का सुंदर चित्र।

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डॉक्टरसीमा मोहन
अध्यापिका
दिल्ली

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14 thoughts on “नव वर्ष का नया चित्र- डॉ सीमा मोहन”

  1. सुंदर रचना
    नव वर्ष के आगमन का अहसास🌺

  2. Awesome 👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻

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