फाग, होलिका उत्सव

फाग, होलिका उत्सव
टेक- पूर्णिमा रात फाल्गुन की प्यारी ।
जन-जन में है उल्लास ।
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पद- जन-जन में है उल्लास,
होलिका दहन तैयारी ।
चंदा मांगें टोली,
होली जलावन वारी ।।
उड़ान- चौराहा में आसन लगी,
लकड़ी का अंबार ।
भक्त, भक्त प्रल्हाद की,
कर रहे जय जयकार ।।
पूर्णिमा……………
पद- कर रहे जय जयकार,
सुबह की बेला आई ।
होली की आग-अंगार,
ले जा रहे बहना-भाई ।।
उड़ान- घर-घर उत्सव हो रहे,
उड़ रहो रंग-गुलाल ।
‘स्नेही’ नर-नारी सब,
रंग में हाल-वे हाल ।।
पूर्णिमा…………

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फाग
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स्वागत रंग से किये नूतन दिन का,
हिन्दु जन हैं खुशहाल ।
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हिंदु जन हैं खुशहाल,
प्रथम है चैत्र महीना ।
नया वर्ष आगाज,
लगे सब कुछ नवीना ।।
प्राकृति रंग बिखेर कर,
सजा रही तरु डार ।
रंग बसंती-पर्व से,
रंग गए अंगना-द्वार ।।
स्वागत…………
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रंग गए,अंगना-द्वार,
भरे घर मेहमानों से ।
गूंज रहीं चौपाल,
बसंत ऋतु के गानों से ।।
लोक रंग प्यारो लगे,
सुरीली मधुर आवाज ।
फूहड़ गीत से ‘स्नेही’ ,
लगे नै कोई खें लाज ।।
स्वागत रंग से………

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रचनाकार-लखन कछवाहा’स्नेही’
मंडला,म.प्र.

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