नव वर्ष प्रेरणा गीत-गायत्री ठाकुर ‘सक्षम’

*नव वर्ष प्रेरणा गीत*
बीते वर्ष को देकर विदाई,
आ गया फिर से नया वर्ष ।
बहुत खोया पाया था हमने,
समय अब करने का उत्कर्ष।
त्रासदी के दौर से गुजरे थे सभी,
परिस्थितियों से न उबर पाए अभी।
ईश्वर से यही है विनय मेरी सदा ,
दिखलाए न वह वक्त फिर कभी ।
सीख लेवें हम सभी अब वक्त से ,
न करें छेड़छाड़ हम प्रकृति से ।
खामियाजा भुगतना पड़ा, सभी को
रहें हम सभी अब उचित विधि से।
सत्कर्मों को सदा करते रहें,
एक दूसरे की प्रेरणा भी बनें।
परोपकार के भाव रखकर,
मदद सबकी हम करते रहें।
मानवीय मूल्यों का संवर्धन ,
हो हमारा पहला उद्देश्य ।
राष्ट्रहित में बनें सहायक
कर्म हमारा सदा विशेष्य।
योग को अपनावें सभी ,
सेहत का ख्याल रखे सभी ।
ध्यान और धारणा को अपनाकर,
दीर्घायु बन जावेंँ सभी ।
पशुधन का हम ध्यान रखें ,
नित गौ सेवा करें सभी ।
जीवो में ईश्वर का निवास ,
यही भाव मन में रखें सभी।
देश की रक्षा हेतु तत्पर रहें ,
जवानों का अपने सम्मान करें ।
नजर जो उठाये देश पर हमारे,
उसका हम पूर्ण विध्वंस करें।
गद्दारों को देकर सजा ,
लेकर सबकी ही रजा ।
राष्ट्रहित कदम उठाएं हरदम,
खुश रहे जिससे जनतांत्रिक प्रजा।
विश्व गुरु था देश हमारा ,
संस्कृति और सभ्यता का न्यारा
वही कीर्तिमान बनाएं ‘सक्षम’
गुणगान करें जिससे विश्व सारा।

गायत्री ठाकुर ‘सक्षम’ नरसिंहपुर ,मध्य प्रदेश
स्वरचित, मौलिक एवं प्रकाशित

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