गजल बिना मिले तुम कमाल करती हो

बिना मिले कमाल करती हो।
ख्वाबों में तुम बवाल करती हो।

तस्वीर के अंदर से बात करती
तो कभी शब्दों में पुकार ती हो।

हमें परेशान करनें के तुम भी
रोज नए नए नुस्खे अपनाती हो।

बच्चों जैसी ज़िद हरकतें करती
तुम भी बड़े अदब से सताती हो।

सुरूर हो या कोई सवाल जब
याद करू तब उलजा जाती हो।

अपनी मनमानी बड़ी चलाती
हो जैसे मेरे सर का ताज हो।

नीक राजपूत
9898693535

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