गुरु भजन

गुरुवर मेरे तुम दाता हो
प्रभु सबके भाग्य विधाता हो।।

दरबार तुम्हारे आने से
बस एक झलक पा जाने से
सांसों की कली खिल जाती है
और कृपा तेरी मिल जाती है।।

इतनी दया प्रभु कर दो
अपनी नजर इधर कर दो
महिमा तेरी बड़ी निराली
तेरी कृपा से भरती झोली।।

सब सुख देते मेरे गुरुवर
दया के सागर मेरे गुरुवर
लगाओ नैया मेरी पार
है प्रणाम तुम्हें बारंबार।।

क्या रखा है आराम में
यह जीवन गुरु के काम में
करो कृपा हे प्रभु परम
मिले मोक्षा अब इसी जनम।।

गुरुवर मेरे तुम दाता हो
प्रभु सबके भाग्य विधाता हो।।
==श्रीराम राय

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