नव भोर-आरती मेहर “रति”

*गीत (नव-भोर)*

अंधेरा मिटने को है अब, आया है नव भोर |
सभी खुशी से नाच उठे हैं, चाहे हो वह मोर ||
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मन में मैल रखो मत कोई, रखो दिलों में प्यार |
सबको खुशियाँ मिलती इतनी, झुमता यह संसार |
सारे करते मस्ती मिलकर, और मचाते शोर |
अंधेरा मिटने को है अब, आया है नव भोर ||
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बीत गया जो बुरा हादसा, करना मत तुम याद |
उत्तम सोचो अच्छा बोलो, मीठा मुँह का स्वाद ||
समय निकल जाएगा यह भी, आयेगा नव दौर |
अंधेरा मिटने को है अब, आया है नव भोर ||
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जात-पात का भाव मिटाओ, रखना अच्छी सोच |
ऊँच-नीच का भेद हटाओ, मनुज-मनुज मत नोच ||
राह सत्य की चलना हरदम, देना इसपर जोर |
अंधेरा मिटने को है अब, आया है नव भोर ||

*आरती मेहर “रति”*
*रायगढ़*

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