नई उम्मीद-कविता भटासणा “कसक “

नई उम्मीद

नई उम्मीदें नए वर्ष की ।
लेकर आए स्वर्णरश्मि जीवन की।।

सृजन कर दे नई सोच की ।
स्फूर झाए चेतना मन के तरंग की ।।

बटोर कर पुराने अनुभव को ।
कठिन जीवन को सरल बनाएं ।।

देकर तिलांजलि व्याधियों को ।
निरोगी मन का स्वास्थ्य बनाएं ।।

खंडहर बनती चली मानवता को। संस्कृति के ज्ञान का पान कराएं ।।

जीससे सुमन खिल जाए जीवन में ।
जो नूतन हर्ष की ज्योति जलाए।।

प्रकृति का खनन करके ।
जीवन को कंटक बना दें ।।

स्वार्थ के रस को छोड़ दे मनुज ।
नई उम्मीद से नया साल बिता दे।।

नए साल की शुभकामना सबको

कविता भटासणा “कसक ”
राजकोट ,गुजरात
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