नया साल का पहला दिन-सुशीला कुमारी

-नया साल का पहला दिन

जब नया साल का पहला दिन
पहला सूरज मुस्काता था
जब साथ सभी का होता था
मन खुशियों से खिल जाता था

उपहार लिए मुस्काते थे आशीष बड़ों से पाते थे
हम खूब मिठाई खाते थे
तब प्रेम और बढ़ जाता था

जब सब पिकनिक पर जाते थे
तब खूब मजा कर पाते थे
बिस्कुट मिक्चर जाने क्या-क्या
सब अपने घर से लाते थे

नदियों में ,पहाड़ों पर, झाड़ियों के बीच,
बेर तोड़ खाते थे मुठ्ठियों को भींच
कांटों से बेर को लाते थे खींच
खट्टे किंतु खाते थे हम अपने नन्हे नन्हे अंखियों को मींच

पापा पापड़ ले आते थे पत्तों पर उसे पकाते थे हम खूब मजे कर पाते थे जब नया साल का पहला दिन
पहला सूरज मुस्काता था।

सुशीला कुमारी, इटखोरी, चतरा, झारखंड

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