नीलम रानी गुप्ता का नव वर्ष

मेरी यह कविता उन चार सालों में लिखी गयी घटनाओं के सम्बंध में सम्बोधित करते हुए है । जिसे विचारों व घटनाओं को जोड़कर लिखी गयी है । तथा नए साल पर लिखी गई इस तरह की पहली सबसे लंबी कविता भी है ।

World of writers

नया साल
(भाग 1)
नये साल पर, दे रहे सभी बधाई , तरह-तरह नये साल की।
और दे रहे दुहाई, खैर करो, परिमाल की।।
खोल के आँखे नये साल में, नये दिनों, रौशनी में।
करो फैसला उस कर्म का, ना हो नज़रें शर्मसार सी।।

(भाग 02) हैप्पी न्यू ईयर
आने वाले साल का, हर पल बनकर पंखुड़ी।
महकाये जीवन आपका, जैसे बगिया फूलों की।।
भँवरों की गुँजन के जैसे, बने ये जीवन एक संगीत।
तितली के पँखों सी सुंदर, खुशियाँ बन जाएं सब मीत।।

(भाग 03) नया साल
आओ नये साल तुम जल्दी, इंतज़ार हम करते हैं।
हर एक साल के जैसे ही हम, स्वागत तुम्हारा करते हैं।।
आओ…..
माना उम्र किसी की जिसमें, कदम बहक भी सकते हैं।
लेक़िन संभल चलाना है तुम्हें, ऊबड़ खाबड़ रस्ते हैं।।
पूरे भी करने जीवन के, देखे जो कुछ सपने हैं।
आओ…..
कहूँ ये कैसे,कैसे मैंने, बीत साल बिताया है।
खो दिया है जितना मैंने, आधा भी नहीं पाया है।।
बस इतना कह तस्सली करते, ना से हाँ तो आते हैं।
आओ……
मजबूरी होगी उसकी कुछ, जो बिना दिये ही चला गया।
आने वाला देगा हमको, कह मन को समझाते है।।
बहुत नहीं है वश में तो भी, इतना तो कर सकते हैं।
आओ……
कुछ दो चाहे या ना भी दो, सम्मान तुम्हारा करते हैं।
क्योंकि तुम पुरुष स्त्री, भेद भाव नहीं करते हैं।
मौका देते तुम सभी को, एक बराबर रखते हैं।
आओ……

(भाग 04) नये साल कुछ तुमसे…..

कहने को तो कह सकती हूँ, अभी बहुत कुछ लेकिन सुन।
डर लगता पर लगे ना तुमको, है कैसा व्यवहार हमारा।।
अभी-अभी आये हो यूँ भी, लगते हो मेहमान से यूँ कि।
कुछ दिन ठहरो बन जाये कुछ, एक रिश्ता बीच हमारा।।
मैंने राशिफल देखा है, कुछ तुमसे पाना है पढ़ा है।
देखेंगे कि रखोगे कितना, तुम अब ध्यान हमारा।।
जीवन में कुछ ना सूना हो, रंग कोई ना फीका हो।
मन में ना कोई शिकवा हो, तू भी है हमको प्यारा।।
डर लगे यदि मन में कोई, हो ऊहापोह जीवन में कोई।
बिना हिचक के थाम लेना, तुम दामन हमारा।।
होंगे साथ सदा तुम्हारे, ना आएगी मुश्किल पांव पसारे।
हर तुफां से जीतेंगे जो, तुम दोगे साथ हमारा।।
अब पिछला तो चला गया, परिचय तुम्हारा दे गया।
देखेंगे तुमको भी अब हम, है कैसा प्यार तुम्हारा?
जाते-जाते पिछला हमको, एक तसल्ली दे गया।
तुमसे परिचय करवा करके, कुछ उम्मीदें दे गया।।
सुख दुःख जीवन पहलू हैं, बिन इनके जीवन सुने हैं।
कुछ सपने पूरे कर गया वो, उसे शुक्रिया हमारा।।

(भाग 05) हमारा नया साल

हैप्पी न्यू ईयर कहते सदा,आओ आज नव वर्ष कह दें।
छोड़ विदेशी परम्पराओं को, कुछ अपना भी अपना लें।।
जिसका स्वागत करती है, चहुँ दिशा और ये धरती,
आओ उसके स्वागत में, शुभकामनायें हम दे लें ।।
नयी पत्तियाँ और कपोलें, भी हमसे ये कहती हैं,
एक बार महसूस करो जो,दिल में यादें बसती हैं।
चले जायेंगे जब जहां से,जो रह निशानी जायेगी,
बह रही जो पवन सुगंधित, दूर लोक ले जाएगी।
नहीं ढूंढ़ना आसमान में, मत तारों में खोजना,
नहीं पाएंगे कहीं भी हमको,बस अपने दिल की सुन लेना।
हम भारतवासी भारत को,अपने दिल में रखते हैं,
चैत्र मास में आने वाले को,नव वर्ष हम कहते हैं।
नयी फसल नयी सुगंध, नयी नयी खुशियाँ नयी उमंग,
नये साल में नये सपनों ने,फैला लिये हैं अपने पंख।
एक आशीष प्यार आपका,हम आपसे चाहते हैं,
और खुले गगन के नीचे उड़कर,मंजिल पाना चाहते हैं।
उम्मीदों की राह पे चलकर,बना नया जहां हम चाहते हैं,
एक बार और हम फिर सबको,हो नव वर्ष शुभ कहते हैं।

(भाग 06)
वेलकम
नव वर्ष मंगल मय हो तुमको
प्यार मिले सबका ढेरों
पुष्प बने पथ कंटक भी और
खुशियों का बस अम्बर हो।।नव…
हर ख्वाहिश हो तुम्हारी पूरी
नहीं गम का एक पल भी हो
करो भूल के पिछली बातें
नये साल का स्वागत हो।।नव…
क्या इसका क्या उसका कहते
तू मेरा मैं तेरा हो
बाय बाय पुराना को करके
वेलकम टू नया साल हो।।नव….

(भाग 07)
तुम भी सोलह

तुम भी 16 चले गये,यादों में यूँ समा गये।
भूल ना पायेंगे तुमको हम,दर्द तुम ऐसा दे गये।।
तुम……
कहा था 15 से कह दे तुम्हें, उसको तुम ना दोहराये
ज़ख्म जो तुमसे पाये हैं,कुछ मरहम ही लगा जाये।
दूर बात मरहम लगना,तुम तो ज़ख्म ही कुरेद गये।
क्या भूलेंगे कल की बातें जो,आता कल भी वही करे।
तुम……
कहीं पलते साँप आस्तीन में,कहीं छाती पर लोटे हैं
आकर दुश्मन के बहकावे में,ज़हर देश में घोले हैं।
करके देश से वो गद्दारी,जीवन से खिलवाड़ कर रहे
बन दुश्मन के हाथ खिलौना,हल मकसद उनका कर रहे।।
तुम…….
सुंदर-2 फूल हैं खिलते,नागफनी के ठूठों से
काँटों को भी भूल हैं जाते,फूलों के आकर्षण से।
नेता सारे नागफनी ये,लालच देते वादों से
मंसूबे पूरे होते ही,चुभन हैं देते काँटों से।।
तुम…..
डालेगा क्या असर ज़हर ये,जो खुद ज़हरीले हो रहे
कहती हूँ बन जाओ चंदन,ना लिपट भुजंग कुछ कर सके।
गिरा के नफ़रत की दीवारें ना,क्यों सबको तुम मिला गये
दोहरा कर इतिहास पुराना , तुम भी 16 चले गये।।
तुम…..

(भाग 08) साल 2017
आ गये हो सत्रह, स्वागत है तुम्हारा।
तुमको भी सोलह के जैसे,न्यौछावर प्यार हमारा।।
आओ मिल सुख दुःख सोलह के,करते हम तुम साझा।
तुमसे भी सोलह के जैसे,लेते हैं कुछ वादा।।
सोलह से बोला था मैंने,खुशियाँ लेकर आना।
पन्द्रह के जैसे वो दुःख के,बादल बन मत छाना।
लेकिन उसने एक ना मानी, किया बंटाधार हमारा।
नहीं निभा पाता है सच में, कोई किया कर वादा।।
छीन लिये कुछ प्यारे अपने,छीना जो था जोड़ा।
किसी -२ बहाने उसने,सपनों को है तोड़ा।
डर लगता है सपनों से अब,खुली पलक हो चाहे बन्द,
समेट रहे अब खुशियाँ ऐसे,ना लुट जायें दुबारा।।
छोड़ के दामन अब सोलह का,सत्रह में हम आ गये,
कुछ निशान मिट गये, कुछ निशान रह गये।
सबने अपने दुःख सहने की,ताकत को आजमाया,
पर नहीं चाहते हो किसी को,फिर वो अहसास दुबारा।।
नया पुराना हो जाता है,कुछ ले जाता कुछ दे जाता है,
यादों के पिटारे में और,कुछ थोड़ा जुड़ जाता है।
क्या करना शिकायत करके,हर एक साल यही होता,
हम जान गये कि ये ही है अब,हाँ स्वभाव तुम्हारा।।
मत सोचो क्या ले गया,मत सोचो क्या दे गया,
बस सोचो अपने लम्हों में,मुक़द्दर हिसाब कर गया।
इसे भी रुकना नहीं साल में,है आगे बढ़ जाना,
इसीलिये कहो फ़र्ज़ निभा कर, स्वागत है तुम्हारा।।
नहीं रिश्ता है कोई निभाता,एक जाता एक आता,
जीवन भर तो कोई साल भी,नहीं कभी साथ निभाता।
आने वाला खत्म करेगा,इंतज़ार हमारा,
इसीलिये हर साल से कहते,है तू दोस्त हमारा।।
सुख दुःख साथ में लाना पर कुछ,नयी उम्मीद जगाना,
रीते-२ आकर तुम भी,मत रीते-२ जाना।
पूछेगा अठरह आकर जब,क्या सत्रह से पाया,
नहीं शिकायत कर सकती तू,भी नहीं कोई पराया।।
छोड़ के जाना अमिट सी यादें,कुछ करना तुम सपने पूरे,
याद रखें जो जीवन भर तुम्हें,ना होगा मिलन दुबारा।
ना पटाकों फुलझड़ियों से,ना डिस्को ना गाना धुन से,
बस प्यार भरे इस दिल से सत्रह, स्वागत है तुम्हारा।।

(भाग 09) साल 2018
आ गये हो अट्ठारह, स्वागत है तुम्हारा।
तुमको भी सत्रह के जैसे, न्यौछावर प्यार हमारा।
आओ सत्रह के सुख दुःख, मिलकर करते साझा।
तुमसे भी सत्रह के जैसे, लेते हैं कुछ वादा।।
सत्रह से बोला था मैंने, कुछ खुशियाँ लेकर आना तुम।
सोलह के जैसे दुख के वो, बादल बन मत छाना तुम।
लेकिन उसने एक ना मानी, किया बंटाधार हमारा।
नहीं निभा पाता है सच में, कोई किया कर वादा।।
छीन लिये कुछ प्यारे अपने, छीना जो था जोड़ा।
किसी-किसी बहाने उसने, सपनों को है तोड़ा।
डर लगता है सपनों से अब, हो खुली पलक या चाहे बंद।
समेट रहे अब खुशियाँ ऐसे, कि ना लुट जाये दुबारा।।
सबने अपने दुख सहने की, ताकत को आजमाया।
पर नहीं चाहते हो किसी को वो, दुःख, अहसास दुबारा।
छोड़ पुराने (17) का दामन जब, है नया साल आ जाता।
कुछ निशान मिट जाते हैं कोई, कुछ निशान रह जाता।।
यादों के पिटारे में और, थोड़ा कुछ जुड़ जाता।
जैसे-जैसे वक़्त बीतता, चला नया साल भी जाता।
क्या करें शिकायत करके, हर साल यही होता।
नया पुराना हो जाता और, कुछ ले जाता,दे जाता।।
मत सोचो क्या ले गया, मत सोचो क्या दे गया।
बस सोचो अपने लम्हों का, मुकद्दर हिसाब करवाता।
जीवन भर तो कोई साल भी, साथ नहीं टिक पाता।
नहीं है रिश्ता कोई निभाता, एक आता एक जाता।।
इसे भी रुकना नहीं साल में, है आगे बढ़ जाना।
फिर भी कह कर फर्ज निभाते, स्वागत है तुम्हारा।
सुख दुख साथ में लाना पर कुछ, नई उम्मीद जगाना।
रीते-रीते आकर तुम भी, मत रीते-रीते जाना।।
पूछेगा अगला आकर जब, क्या पिछले से पाया?
नहीं शिकायत कर सकते कि, नहीं है कोई पराया।
आने वाला खत्म करेगा, इंतजार हमारा।
इसलिये हर साल से कहते, तू है दोस्त हमारा।।
ना पटाकों फुलझड़ियों से, ना डिस्को ना गाना धुन से।
बस प्यार भरे इस दिल से करते, हम स्वागत तुम्हारा।
छोड़ के जाना अमिट सी यादें, कुछ करना तुम पूरे सपने।
याद रखें जो जीवन भर तुम्हें, क्योंकि,ना होगा मिलन दुबारा।।

World of writers

नीलम रानी गुप्ता , बरेली (उप्र)

Share

2 thoughts on “नीलम रानी गुप्ता का नव वर्ष”

  1. 💐💐 अतिप्रशंसनीय, उत्कृष्ट सृजन की बधाइयाँ 💐💐👍💐💐💐
    — राजकुमार छापड़िया

Leave a Comment