सुषमा भंडारी की रचना नव वर्ष

विषय -नववर्ष
World of writers

पाश्चात्य सभ्यता को , न दें कोई महत्व l
भारतीय नववर्ष ही, खुशियों का अस्तित्व ll

भारत  में  घर – घर दिखे , हर्ष और उल्लास l
मना रहे नव वर्ष सब,  नवसंवत्सर खास ll

राधा हो गई ये धरा,  गगन हुए घनश्याम l
नव वर्ष में याद रहे , नव सृजन नव धाम ।।

नव -नूतन नव वर्ष में, खुशियां मिलें अपार l
महामारी का दूर तक, ना हो अब आसार ll

सुखमय  हो संसार सब,  कोरोना हो दूर l
नव वर्ष अब दे रहा, खुशियां सब भरपूर ll

नव हर्ष लेकर यहाँ, आये ये नव वर्ष ।
खुशियों की सौगात से, चहक उठे सब घर ।।

स्वागत है नव वर्ष का, दूर सभी हों क्लेश ।
नव दुर्गा आराधना, सुखी रहे परिवेश ।।

नववर्ष अब आया है , नव सृजन के संग ।
घर घर बजते ही रहें, खुशियों के मृदंग।।
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सुषमा भंडारी 
द्वारका, दिल्ली

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3 thoughts on “सुषमा भंडारी की रचना नव वर्ष”

  1. सुषमा भंडारी जी आपकी रचनाए अति सुंदर हैं आप का भी नव वर्ष मंगलमय हो ईश्वर की कृपा आपकी लेखनी पर बनी रहे और हम इसी तरह आपकी रचनाएं हर्ष उत्साहित होकर पढ़ते रहे। 🙏

  2. सुषमा भंडारी जी आपकी रचनाए अति सुंदर हैं आप का भी नव वर्ष मंगलमय हो ईश्वर की कृपा आपकी लेखनी पर बनी रहे और हम इसी तरह आपकी रचनाएं हर्ष उत्साहित होकर पढ़ते रहे। 🙏

  3. 👌👌💐 अतिउत्कृष्ट सृजन आदरणीया सुषमा भंडारी जी 💐💐💐👍
    — राजकुमार छापड़िया

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