कविता आंचल

आंचल कविता/शायरी ऐ आंचल तेरी छाया में, पहले पहल जिया जीवन में इकलौती छाया, तुमने हमें दिया यहां विधाता भेजा हमको, दुनिया की दर पर छुप छुप जाता आंचल तुझमें, नहीं लगे तब डर लगता जैसे तूं ही घर,जब मैं जग में आया रही सुरक्षित तुमसे तो, मेरी अपनी काया मां के दुःख के आंसू … Read more

मां उगते हुए सूरज का प्रकाश है किरण विजय पोरवाल उज्जवल

माँ मां तो जननी हे, मां उगते हुए सूरज का प्रकाश है, मां तरूवर की छांव हे, मां तपती हुई धूप में आंचल की छांव हे, मां तो कृष्ण की यशोदा है, मां साक्षात अन्नपूर्णा है, मां शांति और प्रेम का अवतार है, माँ नदियों का किनारा है, मां बच्चों की आह ! हे पुकार … Read more

मैं भारत माता की बेटी हूँ हिन्दी

राष्ट्रभाषा हिन्दी का गुणगान शीर्षकः अभिलाषा मैं भारत माता की बेटी हूँ , मैं ही राष्ट्रभाषा हिन्दी हूँ । माथे पर होकर विराजित , सुन्दर शोभनीय बिन्दी हूँ ।। तुम भी भारत के बेटे बेटी , फिर क्यों है अपमान मेरा । मै तो माँ भारत की बेटी , क्या नहीं हिन्दुस्तान तेरा ।। भारत … Read more

अरुण दिव्यांश की रचना गणेश वंदन

गणेश वंदन जय गणपति बप्पा , जयविधाता ज्ञानेश । जय हे प्रभु गजानन , कृपा करो हे कृपेश ।। करुणा बरसाने वाले , अब करुणा बरसा दे । अधमों को ज्ञान देकर , उनका मन हरसा दे ।। गंदगी हो जिनके मन , उनके मन पावन कर दे । दूर गंदगी हो जिससे , शीतल … Read more

आराधना गुँजायमान् त्रिभुवन में

आराधना गुँजायमान् त्रिभुवन में Kawita/Shayari _मिथ्यावादी का अंत अतिपीड़ादायक, बहुत बुरा है।_ _धन दौलत यश ख्याति, पर जीवन दुखों से भरा है।_ _छल प्रपंचों से झूठे लोगों का मन, हरओर धिरा है।_ _सत्यार्थि सुसंस्कारवान्, सहज परमपद सदा पाते।_ _जागतिक् लाँछनाओं से, किंचित वे नहीं धबड़ाते।_ _एक झूठ अपना सौ झूठ बोल भी, छुपा नहीं पाते।_ … Read more

बोल बम बोल बम काँवरिया

गीत बोल बम बोल बम बोलऽ हो काँवरिया । बोल बम बोल बम बोलऽ हो काँवरिया ।। बाबा भोले के चले के नगरिया । बोल बम बोल बम बोलऽ हो काँवरिया ।। भीतर बाहर मन के जगा के । बोल बम बोल बम जयकारा लगाके ।। चलत रहीं धरिके इहे डगरिया । बोल बम बोल … Read more

कुछ भाव पूर्ण भक्ति रचनाएं लखन जी द्वारा

Lakhan

संकंल्प-गजल रक्षक है वसुधा जिंदगी की,प्यार करेंगे । पौधे लगा के वसुधा का, सिंगार करेंगे ।। ___ आये हैं इस जहां में, लेके देह इन्सां की । जिससे जहां का हो भला,शुभकार करेंगे ।। _____ आत्माऐं एक हैं, सभी की देह अलग है । सब जीवों से गुरु जैसे ही, व्यौहार करेंगे ।। _____ शोभायमान … Read more

भजन जिसपर किरपा करते भोले

जिसपर किरपा करते भोले तन पर अपने भष्म लगाए, पहने है मृगछाल जिसपर किरपा करते भोले, होते मालामाल जिनपर किरपा——– गले मे जिनके सर्प की माला, चन्द्र सोहत है भाल शत्रु जिनसे थर-थर काँपे, समझ न पाते चाल कामदेव सा भष्म हो जाता, जिस पर आता काल मिट जाता है धरा से होता, भस्मासुर सा … Read more