हम नया वर्ष मनायें-डा अम्बे कुमारी

हम नया वर्ष मनायें

आओ हम नया वर्ष मनायें
भूल जायें बीते साल के गिले-शिकवे
नूतन वर्ष में हिल-मिल जायें
नये साल में सूरज की किरणों ने
एक नया सबेरा लाया है,
जो इस पूरी पृथ्वी खातिर
खुशियों का संदेशा लाया है,
आओ हम नया वर्ष मनायें,
जग में बहुत उथल-पुथल हो चुकी
सारा जग नयी राह देख रहा,
इसी नयी राह को लेकर
नव वर्ष का नया सबेरा आया,
बीते साल की बीती रजनी
अब अंधियारा मिट चला है,
मानवता का अलख जगाने
देखो नया वर्ष आया है,
आओ हम नया वर्ष मनायें,
सुख-दुःख जीवन के दो पहिए
इन पर चलकर जीवन पथ को सजाएँ
एक-दूसरे का हाथ पकड़कर
हम जीवन पथ पर अग्रसर हो जाएँ,
आँसू पोंछें हर दुखी का
और दुश्मन को भी गले लगाएँ,
आओ हम नया वर्ष मनायें,
सूरज-चाँद और गगन-सितारे भी
देख धरा को मुसकुरायें,
चिड़िया-चुरुगुन और पखेरु
मानव संग हिल-मिलकर गायें,
मानव के हृदय की गहरी संवेदनाएँ
ब्रह्माण्ड के आर-पार चली जाएँ
आओ हम नया वर्ष मनायें।

डा अम्बे कुमारी
सहायक प्राचार्या
हिन्दी विभाग
मगध विश्वविद्यालय, बोधगया, गया, बिहार

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