चलभाष-काव्योत्सव


ऊँ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवा च धीमहि तन्नो रुद्र: प्रचोदयात।
“प्राची साहित्य एवं अवधी शोध संस्थान”
9, पवनपुरी (आलमबाग), लखनऊ
संस्थापक-अध्यक्ष/संयोजक/ संचालक:
डा.सुरेश प्रकाश शुक्ल(साहित्य- भूषण)
रविवार, 29 अगल्त, 2021
अध्यक्षता-श्रीसम्पत्तिकुमार मिश्र ‘भ्रमर बैसवारी’
मु. अ -प्रो. वी.जी.गोस्वामी (पूर्व ला, लविवि)
वि.अ.-डा.अलका मिश्रा (डीएसएन,उन्नाव)
वाणी वंदना-श्री सच्चिदानन्द तिवारी “शलभ”
श्री आनन्दमोहन द्विवेदी (नैकामऊ, उन्नाव)
श्री नरेश दीक्षित (हनुमत कृपा पत्रिका)
डा.बी.जी.द्विवेदी-डा. प्रतिभापाण्डेय (कानपुर)
श्री कैलाशप्रकाश त्रिपाठी “पुंज” (वरिष्ठ कवि)
डा.एस.पी. दीक्षित (पूर्व पत्रकारिता प्र., लविवि)
श्री एम.सी.द्विवेदी (पूर्व डीजीपी, उत्तर प्रदेश)
श्री दयानन्द जडिया “अबोध” (वरिष्ठ कवि)
+डा.सुरेश प्रकाश शुक्ल (साहित्य भूषण)-
वाजिद अली शाह खास, दीवान बालकृष्ण,
लखनऊ नावलगंज मा , बस्ती बसाइनि।
महराजगंज मा , सुन्दर है शिव मंदिर,
साथै एक बड़ा कुआँ, धर्मशाला बनाइनि।।
‘खून बहा गंगा में’ फ़िल्म कै हियाँ भै शूटिंग,
शिखर पे सिंह द्वारे, कबूतर जड़ाइनि।
भोलेनाथ दर्शन औ जल अभिषेक करैं,

भक्तन मनोकामना ,भोला पूरी कराइनि।।

पपीता के बिया लॉन-खेतेम बहाय दियौ,
नमी पाए जामिहैँ, पेड़ बड़ा फल देति है।
ताजगी लावै अउर ,हाज़मा दुरुस्त करै,
असामान्य पीरियड, रस ठीक कै लेति है।
पाक, मीठ, नरम फल, खाए त्वचा चमकै,
यौवन बनाए राखै, यहै ई की नेति है।
दाना-मुहासा अउर, जली त्वचा ठीक करै,
खाव खुब बहुत मद्दा,जानि लियौ सेंति है।।
+श्री सम्पत्तिकुमार मिश्र”भ्रमर बैसवारी”छदकार-
ब्रह्मचर्य पालन से, बढ़ता है ओज-तेज,
रक्षित शरीर रहे, स्वस्थ मन-प्राण है।
कुण्डलिनी जागरण को, आवश्यक संकल्प,
जाग्रत है जीव परब्रह्म में, मिलान है।।
शिष्य का करे वरण, योगक्षेम स्वयं गुरु,
योगेश्वर भी था शिष्य, जो स्वयं प्रधान है।
महिमा अपार, मौन-साधना “भ्रमर”की भी,
महाशक्तियों में यह, शक्ति बलवान है।।
+डॉ. सत्यदेव द्विवेदी “पथिक”-सप्तमी तिथि भाद्र कृष्ण में शीतला मां की पूजा करते हैं। जो उष्ण वृद्धि में ध्यान करे वो मन शीतल धरते हैं।। तन मन से जो शीतल होता वही सुखी भी होता, विधि विधान पूजन जो करते वो धन वैभव भरते हैं ।।
+कर्नल प्रवीण त्रिपाठी (नोएडा)-
आज दिन रविवार का है साँस खुल कर लीजिये।
क्या किया इन सात दिन में ध्यान उसपर दीजिये।।
कर तनिक विश्राम आगे की बनाएं योजना;
भाग्य में अभिवृद्धि के हित अर्घ्य रवि को दीजिये।
+श्री मयंक किशोर शुक्ल “मयंक”-
जो लिखा ब्योम माथे, पे तकदीर है।
शब्द घाटी पुकारे, ये कश्मीर है।।
-हमने तोड़ीं कलुष द्वेष, की डालियाँ,
ये बड़ों की नसीहत की, तासीर है।
-विष भरी पौध रोपी थी जिसने कभी
खा के फल मर रहा वो, बिना नीर है।।
-घाव सुतन के उभर कर, यही कह रहे,
आज कहोगे “मयंक”, ये दबी पीर है।।
+श्री नन्दलालमणि त्रिपाठी (गोरखपुर)-
आकांक्षाओं की अविनि आकाश जीवन उद्देश्य पथ दृष्टि दिशा उजियार, मौलिक चिंतन सोच विचार कल्पना परिकल्पना आविष्कार ‘चलभाष’।। पूज्य ‘संपत्ति’ पल प्रहर संध्या प्रभात प्राभावी उत्साह विश्वाश।। भारत का वैश्विक बैभव ‘बैसवारी’ विराट।।
+सुमधुर काव्य सर्वश्री-पीयूष मिश्र “भइयाजी”, राजेंद्र शुक्ल”राज”, नीतूमिश्रा,संध्या त्रिपाठी।

  • संयोजक डा. सुरेश प्रकाश शुक्ल ने सभी मनीषियों को धन्यवाद ज्ञापित किया।
    काव्यपाठ-आमंत्रण-(7651996416/ 9452741071),संपर्ककर कृतार्थ करें ।
    [29/08, 7:16 pm] भर्मर जी: .(511) चलभाष-काव्योत्सव
    विचार और भाव का संगम स्थल है-साहित्य
    मां कात्यायनी ग्याराहजारी-राष्ट्रीय-काव्य संस्थान
    ‘विमल भवन’, विकास नगर, लखनऊ-22
    चलभाष : 9454831866
    संरक्षक:श्रद्धेय श्रीश्री गंगेश बाबा (मुजफ्फरपुर)
    संस्थापक/संयोजक/संचालक:
    -सम्पत्ति कुमार मिश्र”भ्रमर बैसवारी” (छंदकार)
    मीडिया प्रभारी-श्री पीयूष मिश्र ”भइयाजी”
    रविवार, 29 अगस्त, 2021
    अध्यक्षता-डा. बी.जी.द्विवेदी (चकेरी, कानपुर)
    मु.अ.-डा.सुरेशप्रकाश शुक्ल (साहित्य भूषण)
    वि.अतिथि-डा.सत्यदेव प्रसाद द्विवेदी “पथिक”
    वाणी वंदना-श्री पीयूष मिश्र “भइयाजी”
    श्री गिरीशकुमार अवस्थी (मानवाधिकार)
    श्रीमती आशाअवस्थी (जबलपुर,म.प्र.)
    श्री नरेश दीक्षित (संपादक-हनुमत कृपा पत्रिका)
    डा.अलकामिश्रा(डीएसएनपीजी कालेज,उन्नाव)
    श्री राजेश मोहन मिश्र (साहित्य प्रेमी)
    श्री एम.सी. द्विवेदी (पूर्व जीजीपी, उ त्तर.प्रदेश)
    डा.शोभा वाजपेयी. (वरिष्ठ कवयित्री)
    डा. प्रतिभा पाण्डेय (देवनगर, कानपुर)
    डा.माकूल अहमद खान (वरिष्ठ साहित्यकार)
    श्री रामेश्वर पाण्डेय (पूर्व संपादकीय प्र.दै.जा.)
    श्री अमरेन्द्र तिवारी (दै.जा. मुजफ्फरपुर)
    श्री संतोष कुमार त्रिपाठी (साहित्य प्रेमी)
    श्री अमित टण्डन “कल्लू भइया” (साहित्य प्रेमी)
    ”शेर” मिथिलेशसिंह चौहान (पार्षद-लखनऊ)
    इंजी. विवेकानंद प्रसाद(दै.जा. मुजफ्फपुर)
    श्री शिवकैलाश नारायण तिवारी (साहित्य प्रेमी)
    श्री अलीन्द त्रिवेदी (स्व. रमईकाका के सुपुत्र)
    श्री विनोद शुक्ल- श्री मनोज कुमार झा (पटना)
    श्री प्रेमशंकर पाण्डेय “मानु भइया” (प्रयागराज)
    डा. जानकीशरण शुक्ल (वरिष्ठ साहित्यकार)
    श्री अफजालअहमद अंसारी (वरिष्ठ पत्रकार)
    श्री कैलाश प्रकाश त्रिपाठी “पुंज” (वरिष्ठ कवि)
    श्री महेन्द्र भीष्म (वरिष्ठ साहित्यकार)
    श्री सच्चिदानन्द तिवारी “शलभ” (गीतकार)
    श्री आनन्दमोहन द्विवेदी (नैकामऊ, उन्नाव)- प्रो. वी.जी.गोस्वामी (पूर्व ला)
    श्री एम. सी. द्विवेदी (पूर्व डीजीपी, उ. प्र.)
    श्री राजेन्द्र शुक्ल “राज” (वरिष्ठ कवि)
    डा. संगमलाल त्रिपाठी “भंवर”(प्रतापगढ़)
    +सम्पत्ति कुमार मिश्र “भ्रमर बैसवारी” छंदकार-
    ब्रह्मचर्य पालन से, बढ़ता है ओज-तेज,
    रक्षित शरीर रहे, स्वस्थ मन-प्राण है।
    कुण्डलिनी जागरण को, आवश्यक संकल्प,
    जाग्रत है जीव परब्रह्म में, मिलान है।।
    शिष्य का करे वरण, योगक्षेम स्वयं गुरु,
    योगेश्वर भी था शिष्य, जो स्वयं प्रधान है।
    महिमा अपार, मौन-साधना “भ्रमर”की भी,
    महाशक्तियों में यह, शक्ति बलवान है।।
    +डा.सुरेश प्रकाश शुक्ल (साहित्य भूषण)-
    वाजिद अली शाह खास, दीवान बालकृष्ण,
    लखनऊ नावलगंज मा , बस्ती बसाइनि।
    महराजगंज मा , सुन्दर है शिव मंदिर,
    साथै एक बड़ा कुआँ, धर्मशाला बनाइनि।।
    ‘खून बहा गंगा में’ फ़िल्म कै हियाँ भै शूटिंग,
    शिखर पे सिंह द्वारे, कबूतर जड़ाइनि।
    भोलेनाथ दर्शन औ जल अभिषेक करैं,

भक्तन मनोकामना ,भोला पूरी कराइनि।।

पपीता के बिया लॉन-खेतेम बहाय दियौ,
नमी पाए जामिहैँ, पेड़ बड़ा फल देति है।
ताजगी लावै अउर ,हाज़मा दुरुस्त करै,
असामान्य पीरियड, रस ठीक कै लेति है।
पाक, मीठ, नरम फल, खाए त्वचा चमकै,
यौवन बनाए राखै, यहै ई की नेति है।
दाना-मुहासा अउर, जली त्वचा ठीक करै,
खाव खुब बहुत मद्दा,जानि लियौ सेंति है।।
+डॉ. सत्यदेव द्विवेदी “पथिक”-सप्तमी तिथि भाद्र कृष्ण में शीतला मां की पूजा करते हैं। जो उष्ण वृद्धि में ध्यान करे वो मन शीतल धरते हैं।। तन मन से जो शीतल होता वही सुखी भी होता, विधि विधान पूजन जो करते वो धन वैभव भरते हैं ।।
+कर्नल प्रवीण त्रिपाठी (नोएडा)-
आज दिन रविवार का है साँस खुल कर लीजिये।
क्या किया इन सात दिन में ध्यान उसपर दीजिये।।
कर तनिक विश्राम आगे की बनाएं योजना;
भाग्य में अभिवृद्धि के हित अर्घ्य रवि को दीजिये।
+श्री मयंक किशोर शुक्ल “मयंक”-
जो लिखा ब्योम माथे, पे तकदीर है।
शब्द घाटी पुकारे, ये कश्मीर है।।
-हमने तोड़ीं कलुष द्वेष, की डालियाँ,
ये बड़ों की नसीहत की, तासीर है।
-विष भरी पौध रोपी थी जिसने कभी
खा के फल मर रहा वो, बिना नीर है।।
-घाव सुतन के उभर कर, यही कह रहे,
आज कहोगे “मयंक”, ये दबी पीर है।।
+श्री नन्दलालमणि त्रिपाठी (गोरखपुर)-आकांक्षाओं की अविनि आकाश जीवन उद्देश्य पथ दृष्टि दिशा उजियार, मौलिक चिंतन सोच विचार कल्पना परिकल्पना आविष्कार ‘चलभाष’।। पूज्य ‘संपत्ति’ पल प्रहर संध्या प्रभात प्राभावी उत्साह विश्वाश।। भारत का वैश्विक बैभव ‘बैसवारी’ विराट।।
+सुकाव्य-सर्वश्री-गोबर गणेश, मनमोहन बाराकोटी, नीतू मिश्रा, शीलावर्मा ‘मीरा..
+संयोजक सम्पत्ति कुमार मिश्र “भ्रमर बैसवारी” ने सभी मनीषियों को धन्यवाद ज्ञापित किया।
काव्यपाठ-आमंत्रण(9454831866 /7651996416) संपर्क कर कृतार्थ करेंगे।

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