कविता आंचल

आंचल

कविता/शायरी

ऐ आंचल तेरी छाया में, पहले पहल जिया
जीवन में इकलौती छाया, तुमने हमें दिया
यहां विधाता भेजा हमको, दुनिया की दर पर
छुप छुप जाता आंचल तुझमें, नहीं लगे तब डर

लगता जैसे तूं ही घर,जब मैं जग में आया
रही सुरक्षित तुमसे तो, मेरी अपनी काया
मां के दुःख के आंसू को, तुमने हरदम पोछे
तुम सहलाते मेरे मुख को,जब भी हम रोते

मां जब रोती सदा तुम्हीं ने,ढाढस उसे दिया
मां के गम आंसू को पहले, तुमने सदा पिया

खुश होता है तब ये जग,जब आंचल लहराए
हर तरफ बहारों की तो, भीड़ नजर ही आए

href=”https://kbspr.in”>यहां पढ़ें अनूठी रचनाएं

जनम जनम तक ऋणी सदा, आंचल मैं तो तेरा
ममता तेरी जहां जहां, खिलता रहे सवेरा
सारी दुनिया आंचल है, जिसमें हम सब जीते
सदा सुरक्षित जग रखिए, दिन अच्छे से बीते

देवी प्रसाद पाण्डेय प्रयागराज

Leave a Comment