नव वर्ष-रचना दीप्ति गर्ग

कलम से मिली नव प्रेरणा
दिल से निकलने लगे एहसास,
कोरे कागज पर बिखरने लगी
मैं अपने अल्फाज,
yq का मंच मिला,दोस्तों का संग,
इतना सारा प्यार पाकर मैं हो गई
मस्त मलंग,
कभी दिल की कलम से दुख के
अल्फाज लिखती कभी सुख के,
कभी प्यार के कभी अपने पनके,
नित्य नया अभ्यास मिला रचना के
सार से,
फिर एक दिन मेरी जिंदगी में नया
मोड़ आया, रामदेव बाबा का योग
मेरे मन में समाया,
सुबह सुबह उठकर फिर मैंने रोज
सबको ऑनलाइन योग करना
सिखाया, सब स्वस्थ रहो सुखी रहो
यही बनना सिखाया।
रचना दीप्ति गर्ग

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