बेटी का पत्र-प्रतिभा जैन

प्रिये पिता जी,

आज पिता जी आपकी बहुत याद आ रही है। आज बढ़े हुये तो समझ आ रहा है आप एक साथ एक मिनट में सब कैसे कर लेते है घर चलाना ऑफिस का वर्क शॉप को सँभालना हम बच्चों को सुनना समझना हर ज़िद पूरी करना। आप तो भगवान से भी बढे हो।छोटी छोटी बात मानना मेरी मेरे गुस्सा होने पर भी आप का मानना, न मानने पर आपका भी गुस्सा होना पर आज आपके अलावा ऐसा कोई दूसरा नही है मेरी लाइफ में।मै आज जिद्दी हु तो आपके प्यार की वजह से पापा आपने मेरी हर इच्छा पूरी की है। आज में सिर्फ अपनी जरूरत पूरी करती हूं।पापा आपका एक कॉल मेरी सुबह शानदार बना देता है।पापा मेरे जिद्दी सपनें सिर्फ आप पूरे करते हो आज हम दुनियाँ ख़रीद सकते है। आप जैसे पिता नहीं जो अपनी इच्छाओं को खो कर मेरी इच्छा पूरी करें आपका चोरी से रात को आना और मेरा माथे पर एक किस करना आज बहुत याद आ रहा है।पापा इस सपनें को पूरा करना आपके दूर रहना कैसे रहू पापा।

प्रतिभा जैन
टीकमगढ़ मध्यप्रदेश

Share

Leave a Comment