मां उगते हुए सूरज का प्रकाश है किरण विजय पोरवाल उज्जवल

माँ
मां तो जननी हे,
मां उगते हुए सूरज का प्रकाश है,

मां तरूवर की छांव हे,
मां तपती हुई धूप में आंचल की छांव हे,

मां तो कृष्ण की यशोदा है,
मां साक्षात अन्नपूर्णा है,

मां शांति और प्रेम का अवतार है,
माँ नदियों का किनारा है,

मां बच्चों की आह ! हे पुकार है,
मां तो आँगन की शोभा है,

माँ बिन जग अधूरा हे ,
मां तो अंधेरे में दीपक का प्रकाश है,

माँ बहती नदियों का किनारा है,
मां शक्ति हे मां साहस हे,
माँ तो पन्ना दाई है

मां शांति है मां सुंदर विचार हे,
मां का बच्चों पर आशीर्वाद है,

मां नेह हैं,माँ दुलार हे,
मां तो ममता की छांव है,

माँ की आँखो मै प्रेम की बरसात है,
माँ बिन सुना घर संसार हे,

किरण तो मां के चरणों में नमन है करती,
प्यार भरा आंचल याद है करती।
🙏🏻❤️
किरण विजय पोरवाल उज्जवल उज्जैन

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