अंग्रेजी नव वर्ष क्यों मनाए हम-मंगल कुमार जैन

अंग्रेजी नव वर्ष क्यों मनाए हम?

नव वर्ष की शुभकामनाएं आ गई।
उन्नति हेतु ढेरों बधाइयां आ गई।
सुख शांति की मंगलकामनाएं
व्हाट्सएप से सब दूर आ गई।
सुख शांति की शुभकामनाएं
देखते ही देखते शहर में छा गई।
किसी को नहीं पता सुख शांति कैसे आएगी, कब आएगी?
क्या मौसम है एसा, जो तुम्हारी शुभकामनाएं उन्नति लाएगी?
क्या, पता नहीं है तुमको, अभी
रातें बड़ी और दिन छोटा होता है
सब तरफ से वातावरण ठंडा
और जाडे़ का मारा होता है
क्यों भूलते हो,हमारा नव वर्ष तो
वर्ष प्रतिपदा एकम को आता है
जब सब तरफ वातावरण,खेत- खलियान हरा भरा हो जाता है
गुलामी में रहते रहते,सोच और रीति रिवाज भी गुलाम बना दिए?
अपने स्वर्णिम इतिहास और
त्योहारों के महत्व क्यों भुला दिये?
एक ने बांग लगाई,तो सब ने मिलकर क्यों तान मिलाई?
नहीं सोचा हमने,क्यों और किस की शुभकामनाएं भिजवाई?
क्षमा करना, मेरे खाते में अंग्रेजी नववर्ष की शुभकामनाएं जमा मत करना
अंग्रेजी नव वर्ष की शुभकामनाएं भेजकर,
देश के साथ दगा मत करना
नव वर्ष का इंतजार करें,
वर्ष प्रतिपदा एकम का स्वागत करें
ठहरे, रूके, तनिक विचार करें,
अंग्रेजी नववर्ष का स्वांग न धरे

रचयिता
मंगल कुमार जैन उदयपुर राजस्थान

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