नव वर्ष-ममता शर्मा

*नव बर्ष*

नई उमंगे
नए उत्साह
मन में हमे अब भरना है
बीते दो वर्षो में…..
बहुत कुछ है झेल लिया
लेकिन….
भूलकर सभी कड़वी बातों को
भूलकर सभी कड़वी यादो को
आगे हमे अब बढ़ना है
इस नव वर्ष सबके मन में…..
प्रेम रंग हमे भरना है

नई आशाएं
नए ख़्वाब
हमे आँखो में सजाने है
इस नव वर्ष….
हमे गीत प्रेम के गाने हैं
अपनो को अपनो से मिलाना है
जो हो गए दूर….
उनको पास बुलाना है
रूठो को मनाना है
इस नव वर्ष…..
हमे कुछ करके दिखाना है

*ममता शर्मा*
*स्नातकोत्तर राजकीय कन्या महाविद्यालय*
*सैक्टर-42, चंडीगढ़*

मौलिक एवं अप्रकाशित रचना

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