नव वर्ष आगमन-विनीता सिंह चौहान

नववर्ष आगमन

सुस्वागतम करें ,
हुआ नववर्ष आगमन।

ठंडी फिजाओं को ओढ़ ,
ओस की रुपहली बूंदों से ,
कोहरे की घनी चादर से ,
ढक गया फिर चमन ,
सुस्वागतम करें ,
हुआ नववर्ष आगमन।

कुछ खट्टे कुछ मीठे पल ,
मन में सजों सुनहरी यादें ,
उतार-चढ़ाव के साथ ,
वर्ष ने फिर किया गमन।
सुस्वागतम करें ,
हुआ नववर्ष आगमन।

विश्व बंधुत्व जागृत हो ,
आंतकवादिता खत्म हो ,
असहिष्णुता का अंत हो ,
बुराइयों का हो अब दमन।
सुस्वागतम करें ,
हुआ नववर्ष आगमन।

स्वच्छ भारत अपनाएं ,
प्रदूषण मुक्त हो वातावरण ,
बुराइयां त्याग अच्छाई अपनाएं ,
मन में हो सद्भावों का रमण ,
सुस्वागतम करें ,
हुआ नववर्ष आगमन।

चहुंदिशा विकास से ,
राष्ट्र का उत्थान हो ,
अंत हो राजनीतिक दंगों का ,
देश में हो कायम अमन।
सुस्वागतम करें ,
हुआ नववर्ष आगमन।

उम्मीदों का सूरज उग अाया।
खुशियों की किरण बिखराया।
अब यह मत पूछो कि,
नूतन वर्ष क्या लाया…

बीता 2021, नववर्ष आया।
मन में आशा का दीप जलाया।
कोरोना का संकट दूर होगा,
हर दिल ने नवगीत गुनगुनाया।।
अब यह मत पूछो कि
नूतन वर्ष क्या लाया…

सबका नववर्ष मंगलमय हो।
जीवन में सुख अतिशय हो।

सुस्वागतम करें ,
हुआ नववर्ष आगमन…
हुआ नववर्ष आगमन…

*रचनाकार*
*विनीता सिंह चौहान*
*इंदौर मध्यप्रदेश*
*स्वरचित मौलिक रचना*
*मोबाइल नंबर 94245 12974*

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