नव वर्ष का नव उद्घोष-मीना दुगड़

*नव वर्ष उत्सव*
*नव वर्ष का नव उद्घोष*

जन जन के मन में आशाओं का दीप जला है
नव वर्ष के स्वागत में आतुर मन खिला-खिला है विगत मुश्किल घड़ियों को नजरअंदाज कर
आगे बढ़ने की आई फिर से स्वर्णिम बेला है ।

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नया रंग,नया ढंग,नया उल्लास, नया वर्ष
नव वर्ष में हर दिन का श्रीगणेश करें सहर्ष
ईश आराधना से,ध्यान प्रार्थना से,मंगलभावना से मंजिलें जो थम सी गई, पाना है उन्हें इस वर्ष ।

नई प्रेरणा,नई चेतना,नई स्फुरणा जागे
आशाओं के दीप जले,पथ रोशन हो आगे से आगे
स्नेह और समर्पण से स्वर्ग को भी धरा पर ले आए
तोड़ चले अनैतिकता और अविश्वास के धागे।

नववर्ष का नव उद्घोष,दूर करें स्वदोष
ना हो किंचित रोष,भरे दिलों में अद्भुत जोश
पुरुषार्थ, हौंसले और कर्तव्य परायणता की चाबी से खुलें निराशा के ताले, बने जीवन का विजय घोष।

हंसता जगमगाता नव वर्ष का नव सुप्रभात
कह रहा रोज होता सवेरा,नहीं रहती हमेशा रात
तोड़कर निराशा के घेरों को करें स्वयं पर विश्वास
छंटेंगे तम के स्याह बादल,फैलेगा नव प्रकाश।
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*मीना दुगड़ कोलकाता
स्वरचित रचना*

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