नव वर्ष की नव प्रेरणा-डॉ. रश्मि वार्ष्णेय

नव वर्ष की नव प्रेरणा।

काल गणना ने पूरी की फेरी।
पल-पल करते नववर्ष ले आई।।
काल गणना …

घूमे अपनी धुरी पर धरती।
यात्रा करे सदा कक्षा में अपनी।
अहोरात्रि बदलती, ऋतु बदलती।
काल गणना …

सर्दी ने लपेटी अपनी रजाई।
वसंत भी ले रहा अँगड़ाई।
संक्रांति की घड़ी टिकटिकाई।
काल गणना …

उनींदे बाल रवि ने पलक खोली।
लालिमा क्षितिज पर तैर गई।
अवंतिका हर्ष से मुसकुरा उठी।
काल गणना …

सकारात्मक होने लगी जिंदगी।
इच्छा-पूर्ति की आस भी लाई।
मिलेगी सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य में वृद्धि।
काल गणना …

नव निर्माण की दृढ़ नींव नई।
ज्ञान-विज्ञान के प्रकाश से भरी।
नव प्रेरणा लेने का अवसर यही।
काल गणना .

डॉ. रश्मि वार्ष्णेय

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