नव वर्ष-राम बाबू शर्मा

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कविता
*नव वर्ष*
World of writers
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ठंडी-ठंडी पवन चले,
शीत लहर मतवाली।
नूतन वर्ष मनभावन,
अनुपम शान निराली।।

नूतन वर्ष ले आया,
हरियाली की चादर।
धरा पुत्र भी खिल उठा,
मन से करता आदर।।

ओस बूंद मोती बन,
फसलों पर जो छाई।
हरी-भरी वो डाली,
मन ही मन शरमाई।।

नूतन वर्ष लाता है,
खुशियाँ भरी सौगात।
परमेश्वर की लीला,
अपनों से मुलाकात।।
Read your life

कहीं धूप,कही छाँव,
पकवानों की भरमार।
नव वर्ष महिमा न्यारी
मनमोहक अपरम्पार।।

©®
रामबाबू शर्मा,राजस्थानी,दौसा(राज.)

रामबाबू शर्मा,राजस्थानी,दौसा(राज.)

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